तेल अवीव: इजराइल में 90 प्रतिशत से ज्यादा वोटों की गिनती पूरी हो चुकी है, लेकिन अब भी सरकार गठन की तस्वीर साफ नहीं है। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और विपक्षी नेता गादी आइजनकोट, दोनों के गठबंधन बहुमत के आंकड़े से दूर हैं।
इजराइल की संसद में कुल 120 सीटें हैं और सरकार बनाने के लिए कम से कम 61 सीटों की जरूरत होती है। हालांकि, बहुमत से कम सीटें मिलने के बावजूद नेतन्याहू के पास सरकार बनाने के विकल्प मौजूद हैं।
खास बात यह है कि सरकार गठन के लिए उन्हें 19 सीटों वाली अरब पार्टियों का समर्थन लेना जरूरी नहीं है। वहीं, विपक्षी नेता गादी आइजनकोट के पास भी सत्ता तक पहुंचने के तीन संभावित रास्ते बताए जा रहे हैं। अब सबकी नजर इस बात पर है कि इजराइल में अगली सरकार का गठन किस तरह होता है।
नेतन्याहू के पास 3 विकल्प
1. विपक्षी खेमे के सांसदों का समर्थन जुटाना
नेतन्याहू विपक्षी गठबंधन में शामिल किसी पार्टी या उसके कुछ सांसदों को अपने साथ लाने की कोशिश कर सकते हैं। इसके लिए उन्हें सरकार में शामिल होने का प्रस्ताव देने या उनकी कुछ मांगें मानने की जरूरत पड़ सकती है। अगर विपक्षी खेमे के कुछ सांसद विश्वास मत में नेतन्याहू का समर्थन करते हैं या मतदान से दूर रहते हैं, तो उनके लिए सरकार बनाने का रास्ता आसान हो सकता है।
हालांकि, विपक्षी नेताओं ने चुनाव में नेतन्याहू को सत्ता से हटाने का लक्ष्य रखा था। इसलिए उनके किसी सहयोगी का नेतन्याहू के पक्ष में जाना राजनीतिक रूप से मुश्किल हो सकता है। अभी किसी खास विपक्षी नेता के पाला बदलने की पुष्टि नहीं हुई है।
2. राष्ट्रीय एकता सरकार बनाना
नेतन्याहू दूसरी पार्टियों के साथ मिलकर राष्ट्रीय एकता सरकार बनाने की कोशिश भी कर सकते हैं। इसमें उनके मौजूदा दक्षिणपंथी और धार्मिक सहयोगियों के साथ विपक्ष के कुछ नेता भी शामिल हो सकते हैं। पूर्व प्रधानमंत्री नफ्ताली बेनेट या गादी आइजनकोट जैसे नेताओं की भूमिका इस विकल्प में अहम हो सकती है।
लेकिन इसके लिए प्रधानमंत्री पद, सैन्य सेवा से जुड़े नियमों और दूसरी नीतियों पर समझौता करना होगा। आइजनकोट और नेतन्याहू के बीच राजनीतिक मतभेद इस रास्ते की बड़ी बाधा हैं। इसके अलावा, नेतन्याहू के अति-दक्षिणपंथी सहयोगियों को भी विपक्षी नेताओं के साथ सत्ता साझा करना मंजूर होना जरूरी नहीं है।
3. अल्पमत सरकार चलाना
तीसरा विकल्प ऐसी सरकार बनाना है, जिसके पास अपने गठबंधन में 61 सीटें न हों, लेकिन वह विश्वास मत हासिल कर ले। इसके लिए जरूरी नहीं कि अरब पार्टियां सरकार में शामिल हों। यदि वे मतदान से दूर रहती हैं या सरकार के खिलाफ वोट नहीं देतीं, तो संसद में मौजूद और वोट करने वाले सांसदों के हिसाब से सरकार विश्वास मत जीत सकती है।
हालांकि, यह विकल्प सरकार को स्थिरता की गारंटी नहीं देता। बजट, कानून और दूसरे बड़े फैसलों के लिए नेतन्याहू को संसद में समर्थन जुटाना होगा। अगर विरोधी दल एकजुट होकर सरकार के खिलाफ वोट करते हैं, तो उनकी सरकार संकट में पड़ सकती है।
ये भी पढ़ें: जियो के अगले दशक का रोडमैप तैयार, एआई और स्पेस टेक्नोलॉजी पर आकाश अंबानी का दांव
गादी आइजनकोट गठबंधन की उम्मीदें भी कायम
नेतन्याहू को सत्ता से हटाने की कोशिश कर रहे गादी आइजनकोट गठबंधन की उम्मीदें भी कायम हैं। 48 सीटों में आगे चल रहे इस गठबंधन के पास सरकार बनाने के रास्ते मौजूद हैं।

