मुंबई। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), क्लाउड कंप्यूटिंग और अंतरिक्ष आधारित कनेक्टिविटी के क्षेत्र में विस्तार के साथ जियो प्लेटफॉर्म्स अगले दशक की तकनीकी क्रांति का नेतृत्व करने की तैयारी में है। कंपनी के प्रबंध निदेशक आकाश अंबानी ने कहा कि जियो का लक्ष्य ऐसी आधुनिक तकनीकों और डिजिटल सेवाओं को आम भारतीयों तक पहुंचाना है, जो उनकी जिंदगी और काम करने के तरीकों को बदल सकें। शेयर बाजार में सूचीबद्धता को उन्होंने कंपनी की मंजिल नहीं, बल्कि एक नई शुरुआत बताया।
आकाश अंबानी के मुताबिक, आने वाले 10 वर्षों में जियो का ध्यान एआई, क्लाउड कंप्यूटिंग, कनेक्टेड डिवाइस और अंतरिक्ष के जरिये कनेक्टिविटी जैसी तकनीकों पर रहेगा। कंपनी ऐसी डिजिटल सेवाओं को भी विकसित करने की दिशा में काम करेगी, जिनकी अभी व्यापक स्तर पर कल्पना नहीं की गई है। उनका कहना था कि जियो का उद्देश्य तकनीकी नवाचारों को केवल चुनिंदा लोगों तक सीमित रखने के बजाय आम नागरिकों के लिए सुलभ बनाना है।
95 मिनट में पूरा सब्सक्राइब हुआ आईपीओ
आकाश अंबानी ने बताया कि जियो प्लेटफॉर्म्स का आईपीओ महज 95 मिनट में पूरी तरह सब्सक्राइब हो गया। उनके अनुसार, निर्गम को 7.5 लाख करोड़ रुपये से अधिक की मांग मिली और 13 करोड़ से ज्यादा भारतीयों ने इसमें हिस्सा लिया।
उन्होंने निवेशकों का आभार जताते हुए कहा कि कंपनी की जिम्मेदारी अब उनकी संपत्ति की रक्षा करने और उसे आगे बढ़ाने की है। इसके लिए जियो को ग्राहकों के लिए लगातार अधिक मूल्य तैयार करना होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि शेयर बाजार में सूचीबद्ध होना किसी कंपनी की यात्रा का अंतिम पड़ाव नहीं, बल्कि भविष्य में और बेहतर प्रदर्शन करने की शुरुआत है।
ईशा अंबानी ने याद किया रिलायंस का पहला आईपीओ
जियो प्लेटफॉर्म्स की निदेशक ईशा अंबानी ने अपने संबोधन में रिलायंस के शुरुआती सार्वजनिक निर्गम का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि वर्ष 1977 में उनके दादा धीरूभाई अंबानी ने रिलायंस टेक्सटाइल इंडस्ट्रीज का आईपीओ पेश किया था। उस समय कंपनी ने 2.82 करोड़ रुपये जुटाए थे और उसका मूल्यांकन करीब 10 करोड़ रुपये था।
ईशा के मुताबिक, जियो प्लेटफॉर्म्स ने इस साल लगभग 15.5 अरब डॉलर का राजस्व और करीब 8 अरब डॉलर की कमाई दर्ज की। रिलायंस की तीन पीढ़ियों की कारोबारी यात्रा का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि किस तरह एक छोटे औद्योगिक उद्यम से शुरू हुआ समूह दूरसंचार, खुदरा कारोबार और डिजिटल सेवाओं तक फैल चुका है।
79.8 लाख शेयरधारकों के साथ जियो ने बनाया रिकॉर्ड
आईपीओ के बाद जियो प्लेटफॉर्म्स का शेयरधारक आधार बढ़कर करीब 79.8 लाख हो गया है। इस आंकड़े के साथ कंपनी देश में सबसे अधिक शेयरधारकों वाली कंपनियों में शीर्ष पर पहुंच गई है।
प्रमुख कंपनियों के शेयरधारक
- जियो प्लेटफॉर्म्स: 79.8 लाख
- टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स: 61.2 लाख
- वोडाफोन आइडिया: 57.9 लाख
- इंडियन रेलवे फाइनेंस कॉरपोरेशन: 50.1 लाख
शेयरधारकों की बड़ी संख्या को जियो के आईपीओ में निवेशकों की व्यापक भागीदारी के रूप में देखा जा रहा है।
तीन पीढ़ियों में बदली रिलायंस की कारोबारी तस्वीर
रिलायंस समूह की कहानी धीरूभाई अंबानी की उद्यमशीलता से शुरू हुई। वर्ष 1977 में कंपनी के पहले आईपीओ के समय समूह का बाजार पूंजीकरण करीब 10 करोड़ रुपये था। 6 जुलाई 2002 को धीरूभाई अंबानी के निधन तक यह बढ़कर 43,761 करोड़ रुपये पहुंच गया था।
दूसरी पीढ़ी: मुकेश अंबानी के नेतृत्व में रिलायंस ने पेट्रोकेमिकल्स, दूरसंचार, खुदरा कारोबार और डिजिटल सेवाओं में विस्तार किया। इससे समूह का कारोबारी आकार कई गुना बढ़ा और उसका बाजार पूंजीकरण 15 लाख करोड़ रुपये से अधिक पहुंच गया।
तीसरी पीढ़ी: आकाश, ईशा और अनंत अंबानी समूह के विभिन्न कारोबारों को आगे बढ़ा रहे हैं। जियो प्लेटफॉर्म्स की सूचीबद्धता के बाद रिलायंस समूह का बाजार पूंजीकरण करीब 28.72 लाख करोड़ रुपये बताया गया है। इसके साथ समूह ने बाजार मूल्य के लिहाज से टाटा समूह को पीछे छोड़ दिया है।
100 अरब डॉलर से अधिक मूल्यांकन वाली कंपनियों में जियो
जियो प्लेटफॉर्म्स की सूचीबद्धता ने कंपनी को वैश्विक तकनीकी कारोबार के प्रमुख खिलाड़ियों की श्रेणी में ला खड़ा किया है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, मेटा, अलीबाबा और स्पेसएक्स के बाद जियो प्लेटफॉर्म्स ऐसी कंपनियों के समूह में शामिल है, जिन्होंने आईपीओ के समय 100 अरब डॉलर से अधिक का इक्विटी मूल्यांकन हासिल किया।
एआई और डिजिटल सेवाओं पर रहेगा जोर
जियो की भविष्य की रणनीति से स्पष्ट है कि कंपनी अब केवल दूरसंचार सेवाओं तक सीमित नहीं रहना चाहती। एआई, क्लाउड कंप्यूटिंग, कनेक्टेड डिवाइस और अंतरिक्ष आधारित कनेक्टिविटी में विस्तार के जरिये वह डिजिटल अर्थव्यवस्था में अपनी भूमिका बढ़ाना चाहती है।
आकाश अंबानी के सामने अब आईपीओ के बाद निवेशकों की उम्मीदों पर खरा उतरने और तकनीकी नवाचारों को व्यावसायिक सफलता में बदलने की चुनौती होगी। आने वाला दशक बताएगा कि जियो अपनी विशाल ग्राहक संख्या और डिजिटल बुनियादी ढांचे के दम पर वैश्विक तकनीकी प्रतिस्पर्धा में कितनी मजबूत जगह बना पाती है।

