बालाघाट: नगर के शासकीय देवी तालाब के संरक्षण और अतिक्रमण हटाने के मामले में राष्ट्रीय हरित अधिकरण भोपाल ने सख्त रुख अपनाया है। 18 सितंबर 2026 को हुई सुनवाई में न्यायाधिकरण ने पूर्व में दिए गए आदेशों के अनुपालन की स्थिति पर नाराजगी जताई और मुख्य नगरपालिका अधिकारी, बालाघाट को दो सप्ताह के भीतर व्यक्तिगत शपथ-पत्र के साथ कार्रवाई की रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। मामले में सुप्रीम कोर्ट के जलस्रोत संरक्षण संबंधी आदेशों के अनुपालन तथा एनजीटी के पूर्व आदेशों पर भी जोर दिया गया है।
27 अप्रैल के आदेश पर अमल नहीं होने का आरोप
देवी तालाब को प्रदूषणमुक्त कर उसके मूल स्वरूप में संरक्षित करने के लिए बालाघाट निवासी द्वारका नाथ चौधरी एवं प्रदीप परांजपे की ओर से एनजीटी भोपाल में ओए/130/2025 प्रस्तुत किया गया था। इस मामले में एनजीटी ने 27 अप्रैल 2026 को आदेश जारी करते हुए कलेक्टर बालाघाट को वेटलैंड नियम, 2017 की धारा 4 के प्रावधानों के अनुरूप कार्रवाई करने तथा तालाब से अतिक्रमण हटाने सहित प्रतिबंधित क्षेत्र में सीमांकन, बाड़बंदी और चेतावनी/संकेतक लगाने के निर्देश दिए थे।
वहीं, नगरपालिका को तालाब की सफाई, ठोस एवं प्लास्टिक कचरे की रोकथाम और खरपतवारों को वैज्ञानिक तरीके से हटाने के लिए समयबद्ध कार्रवाई करने तथा वन विभाग के साथ तालाब की परिधि में स्थानीय प्रजातियों का सघन पौधरोपण करने के निर्देश दिए गए थे। याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि निर्धारित समय में इन निर्देशों का अपेक्षित रूप से पालन नहीं हुआ।
आदेश के अनुपालन के लिए दाखिल हुई निष्पादन याचिका
एनजीटी के आदेशों के कथित अनुपालन न होने पर याचिकाकर्ताओं की ओर से निष्पादन याचिका क्रमांक ईए/13/2026दाखिल की गई। 24 जुलाई 2026 को एनजीटी ने प्रमुख सचिव वन विभाग, कलेक्टर बालाघाट, मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, अनुविभागीय अधिकारी बालाघाट और मुख्य नगरपालिका अधिकारी सहित संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था।
18 सितंबर की सुनवाई में क्या हुआ?
18 सितंबर की सुनवाई के दौरान न्यायाधिकरण के समक्ष यह स्थिति सामने आई कि प्रमुख सचिव वन, कलेक्टर, अनुविभागीय अधिकारी बालाघाट और मुख्य नगरपालिका अधिकारी बालाघाट की ओर से जवाब दाखिल नहीं किया गया था। इस पर न्यायाधिकरण ने संबंधित अधिकारियों को दो सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए। वहीं मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने अपने जवाब में बताया कि उसने कलेक्टर और मुख्य नगरपालिका अधिकारी को एनजीटी के आदेशों का पालन करने के लिए पत्र जारी किए थे।
16.14 एकड़ भूमि और सुप्रीम कोर्ट के आदेश का संदर्भ
सुनवाई के दौरान एनजीटी ने देवी तालाब की 16.14 एकड़ भूमि के संरक्षण को लेकर सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के अनुपालन का निर्देश दिया। मुख्य नगरपालिका अधिकारी को तालाब क्षेत्र के संरक्षण के लिए सैटेलाइट इमेजरी, मुनार, पिलर और कंटीले तारों से सुरक्षा जैसे उपाय करने तथा संबंधित कार्रवाई की रिपोर्ट व्यक्तिगत शपथ-पत्र के माध्यम से प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।
जलस्रोतों से अतिक्रमण हटाने पर सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला
एनजीटी ने एम.सी.मेहता बनाम कमल नाथ तथा हिंचलाल तिवारी बनाम कमला देवी जैसे सुप्रीम कोर्ट के निर्णयों के अनुपालन पर भी जोर दिया। न्यायाधिकरण ने जलस्रोतों से अतिक्रमण हटाने तथा जल निकायों और वेटलैंड के संरक्षण को सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। कलेक्टर बालाघाट को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है कि देवी तालाब में बिना उपचारित पानी, सीवेज अथवा ठोस कचरा प्रवेश न करे तथा पानी की गुणवत्ता निर्धारित पर्यावरणीय मानकों के अनुरूप बनाए रखने के लिए निगरानी की जाए।
प्रदूषण बोर्ड को भी कार्रवाई के निर्देश
मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को पर्यावरणीय नियमों के अनुपालन की निगरानी करने के निर्देश दिए गए हैं। यदि बिना उपचारित सीवेज अथवा प्रदूषित पानी जलाशय में छोड़े जाने का उल्लंघन पाया जाता है, तो लागू कानून और एनजीटी के निर्देशों के अनुसार पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति निर्धारित करने, वसूलने तथा आवश्यक कानूनी कार्रवाई करने की बात कही गई है।
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अब नजर दो सप्ताह की कार्रवाई पर
देवी तालाब मामले में अब सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि एनजीटी के दो सप्ताह के अल्टीमेटम के भीतर कलेक्टर, नगरपालिका और संबंधित विभाग जमीन पर क्या कार्रवाई करते हैं तालाब की जमीन का संरक्षण, अतिक्रमण पर कार्रवाई, प्रदूषित पानी की रोकथाम और जल निकाय की वास्तविक स्थिति की रिपोर्ट अब न्यायाधिकरण के समक्ष प्रस्तुत की जानी है। देवी तालाब को लेकर जारी न्यायिक प्रक्रिया ने अब प्रशासन के सामने एक स्पष्ट सवाल खड़ा कर दिया है कि एनजीटी के आदेश कागजों तक सीमित रहेंगे या जमीन पर भी दिखाई देंगे?

