दिल्ली। करीब दो दशकों तक बिहार की राजनीति का केंद्र रहे नीतीश कुमार ने अब राष्ट्रीय स्तर पर अपनी नई पारी की शुरुआत कर दी है। शुक्रवार को उन्होंने राज्यसभा सांसद के रूप में शपथ लेकर संसद के उच्च सदन में प्रवेश किया, जिससे देश की राजनीति में नई हलचल तेज हो गई है।
शपथ के बाद पुरानी यादें ताजा
शपथ ग्रहण के बाद संसद परिसर से बाहर निकलते वक्त नीतीश कुमार ने पुराने संसद भवन की ओर इशारा करते हुए कहा- “पहले हम यहीं थे। ” यह बयान उनके लंबे संसदीय अनुभव और पुराने राजनीतिक दौर की यादों को दर्शाता है। बाहर मौजूद लोगों का उन्होंने हाथ जोड़कर अभिवादन भी किया।
संसद के हर सदन का अनुभव
बता दें नीतीश कुमार अब उन चुनिंदा नेताओं में शामिल हो गए हैं, जिन्होंने विधानसभा, विधान परिषद, लोकसभा और राज्यसभा चारों सदनों में सदस्य के रूप में कार्य किया है। उनका यह अनुभव उन्हें राष्ट्रीय राजनीति में एक मजबूत और अनुभवी चेहरा बनाता है।
1989 – 2005 के बीच कई बार लोकसभा सांसद रह चुके नीतीश कुमार अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में केंद्रीय मंत्री भी रह चुके हैं। अब एक बार फिर संसद में उनकी वापसी को अनुभव और रणनीति के मेल के रूप में देखा जा रहा है।
नीतीश कुमार की राज्यसभा में एंट्री के साथ ही यह साफ हो गया है कि अब केंद्र की राजनीति में अधिक सक्रिय भूमिका निभा सकते हैं। शपथ से पहले उनकी मुलाकात जे.पी.नड्डा से भी हुई, जिसे राजनीतिक तौर पर अहम माना जा रहा है।
बिहार की सियासत पर असर
नीतीश कुमार के दिल्ली शिफ्ट होने के बाद बिहार में नेतृत्व को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। हालांकि जनता दल यूनाइटेड और एनडीए खेमे का दावा है कि राज्य में विकास की रफ्तार और नीतियां पहले की तरह जारी रहेंगी।

