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बालाघाट ज़िला पंचायत CEO अभिषेक सर्राफ के खिलाफ लामबंद हुए अधिकारी !

बालाघाट। मध्यप्रदेश के बालाघाट जिले में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के अधिकारी और कर्मचारी खुलकर विरोध में उतर आए हैं। मध्यप्रदेश पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग अधिकारी–कर्मचारी संयुक्त मोर्चा संगठन, जिला बालाघाट ने जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपते हुए जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी अभिषेक सर्राफ को हटाने की मांग की है। ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ लगातार दुर्व्यवहार किया जा रहा है तथा अनावश्यक दबाव बनाकर कार्य कराया जा रहा है।

देर रात तक वीडियो कॉन्फ्रेंस और अभद्र व्यवहार का आरोप

वहीं संयुक्त मोर्चा का कहना है कि प्रतिदिन शाम 6 बजे से रात 8–9 बजे तक वीडियो कॉन्फ्रेंस ली जाती है, जिसमें कथित रूप से अभद्र भाषा का प्रयोग किया जाता है। कर्मचारियों ने मांग की है कि समीक्षा बैठकें कार्यालयीन समय में और साप्ताहिक आधार पर आयोजित की जाएं, ताकि विशेषकर महिला कर्मचारियों को असुविधा न हो।

वेतन कटौती, स्थानांतरण और दबाव की शिकायत

बता दें ज्ञापन में यह भी उल्लेख है कि योजनाओं की दैनिक प्रगति के आधार पर वेतन कटौती की कार्रवाई की जा रही है, जिसे तत्काल बंद किया जाए और काटी गई राशि वापस की जाए। साथ ही, स्थानांतरण पर रोक के बावजूद सचिव, सहायक सचिव और अन्य कर्मचारियों को अन्यत्र कार्य करने के आदेश दिए जाने पर भी आपत्ति जताई गई है। संगठन का कहना है कि नियमविरुद्ध कार्यों के लिए दबाव बनाया जाता है और बाद में उन्हीं मामलों में कार्रवाई कर कर्मचारियों को परेशान किया जाता है।

योजनाओं के क्रियान्वयन में ‘टारगेट’ का विरोध

जानकारी अनुसार, संयुक्त मोर्चा ने प्रधानमंत्री आवास योजना के 2016 से 2022 तक लंबित मामलों को लेकर अनावश्यक दबाव बनाए जाने का आरोप लगाया है। इसके अलावा मनरेगा जैसी मांग आधारित योजना में लक्ष्य निर्धारित कर श्रमिक नियोजन के लिए दबाव बनाने की बात भी कही गई है। सीएम हेल्पलाइन प्रकरणों को बंद कराने और ‘फोर्स क्लोज’ की कार्रवाई को लेकर भी असंतोष जताया गया है।

सामूहिक अवकाश और अनिश्चितकालीन हड़ताल का ऐलान

साथ ही संगठन ने स्पष्ट किया है कि यदि मांगों पर शीघ्र निर्णय नहीं लिया गया और CEO को नहीं हटाया गया, तो 28 फरवरी से 1 मार्च 2026 तक सामूहिक अवकाश पर रहेंगे। इसके बाद 2 मार्च 2026 से अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू की जाएगी।

इस घटनाक्रम से जिला पंचायत और ग्रामीण विकास से जुड़ी योजनाओं के संचालन पर असर पड़ने की संभावना है। अब देखना होगा कि जिला प्रशासन इस विवाद को कैसे सुलझाता है और क्या कोई मध्य मार्ग निकलता है।

 

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