नई दिल्ली: दुनिया में अमेरिका और चीन के बीच बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने बदलते ग्लोबल ऑर्डर को लेकर बड़ी बात कही है। नई दिल्ली में Munich Leaders Meeting के दौरान उन्होंने कहा कि आज देशों के लिए हर मुद्दे पर एक जैसी सोच रखना जरूरी नहीं रह गया है। जिन मामलों में हित और सोच मिलती है, उन पर देश एक-दूसरे के साथ काम कर सकते हैं।
जयशंकर के मुताबिक मौजूदा वैश्विक व्यवस्था में तीन बड़े बदलाव दिखाई दे रहे हैं—अमेरिका की बदलती भूमिका, चीन का बढ़ता प्रभाव और दुनिया के देशों की एक-दूसरे पर निर्भरता। इसी वजह से उभरती और मध्यम ताकतें अब अपनी अर्थव्यवस्था और सुरक्षा को लेकर ज्यादा सतर्क हो रही हैं।
एक देश पर निर्भर रहने के बजाय विकल्प तलाश रहे देश
जयशंकर ने कहा कि उभरती और मध्यम ताकतें डी-रिस्किंग और विविधीकरण पर ध्यान दे रही हैं। आसान शब्दों में इसका मतलब है कि कोई देश अपनी सप्लाई चेन, व्यापार या सुरक्षा के लिए सिर्फ एक देश पर निर्भर न रहे। इसके बजाय अलग-अलग विकल्प तैयार किए जाएं, ताकि संकट की स्थिति में नुकसान कम हो।
उन्होंने मजबूत सप्लाई चेन और नई व्यवस्थाएं विकसित करने की जरूरत पर जोर दिया। जयशंकर के मुताबिक अब सहयोग का आधार यह नहीं है कि दो देशों की सोच हर मुद्दे पर एक जैसी हो। अगर उनके बीच पर्याप्त साझा हित हैं तो वे उन मुद्दों पर साथ मिलकर आगे बढ़ सकते हैं।
अमेरिका और चीन दोनों से रिश्ते रखना संभव
जयशंकर ने कहा कि उभरती और मध्यम ताकतें आपस में सहयोग बढ़ाते हुए अमेरिका और चीन दोनों से संबंध बनाए रख सकती हैं, बशर्ते उनके हितों में सीधा टकराव न हो। इस बदलती व्यवस्था को समझाने के लिए उन्होंने Quad और BRICS जैसे समूहों का उदाहरण दिया।
BRICS को लेकर उन्होंने कहा कि इसमें शामिल देशों को लगता है कि अलग-अलग बोलने की बजाय सामूहिक आवाज ज्यादा मजबूत होती है। यही वजह है कि बदलती दुनिया में छोटे और मुद्दों पर आधारित समूहों की भूमिका बढ़ रही है।
यह भी पढ़ें: बिहार में बाढ़ पर गरजे राहुल गांधी, NDA सरकार से पूछा -17 साल में स्थायी समाधान क्यों नहीं?
नए कॉरिडोर और कनेक्टिविटी पर भी जोर
कनेक्टिविटी पर बात करते हुए विदेश मंत्री जयशंकर ने भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारा (IMEC), अंतरराष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारा (INSTC) और उत्तरी समुद्री मार्ग का जिक्र किया। साथ ही उन्होंने भारत की पहल वाले अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन (ISA) और आपदा रोधी बुनियादी ढांचे के गठबंधन (CDRI) को भी नए तरह के वैश्विक सहयोग के उदाहरण के तौर पर पेश किया।
जयशंकर ने कहा कि डी-रिस्किंग, विविधीकरण और विकल्प खुले रखने की रणनीति से धीरे-धीरे एक नया वैश्विक ढांचा बन रहा है। इसमें देश किसी एक खेमे में पूरी तरह शामिल होने के बजाय अपने हितों के हिसाब से अलग-अलग साझेदारों के साथ काम कर रहे हैं।

