पटना: बिहार के नालंदा में शराब तस्करों की गोलीबारी में आबकारी विभाग के एक सिपाही की मौत के बाद प्रदेश की कानून-व्यवस्था को लेकर सियासत गरमा गई है। पूर्णिया से निर्दलीय सांसद पप्पू यादव ने राज्य सरकार पर तीखा हमला करते हुए कहा कि बिहार में आम जनता की सुरक्षा भगवान भरोसे है। यहां केवल नेता, अधिकारी और माफिया ही सुरक्षित हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश में अपराधियों का प्रभाव लगातार बढ़ रहा है, जबकि आम लोगों की सुरक्षा पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
शराब माफिया और नेताओं के संबंधों पर उठाए सवाल?
पप्पू यादव ने आरोप लगाया कि बिहार की राजनीति में अपराध और पैसे का प्रभाव बढ़ता जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि चुनाव लड़ने वाले कई नेताओं के संबंध शराब, बालू और नशीले पदार्थों के अवैध कारोबार से जुड़े लोगों के साथ हैं। उनका कहना है कि अवैध कारोबार से होने वाली कमाई का इस्तेमाल चुनावों में भी किया जाता है।
उन्होंने सवाल उठाया कि जब कानून लागू कराने वाले कर्मचारी ही सुरक्षित नहीं हैं, तो आम जनता की सुरक्षा की जिम्मेदारी कौन लेगा। नालंदा की घटना को लेकर उन्होंने अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।
बाढ़ और नाव हादसे पर सरकार को घेरा
सांसद ने राघोपुर नाव हादसे और बिहार में बाढ़ से हुई मौतों को लेकर भी सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि हर साल बाढ़ से लोगों की जान जाती है और हजारों परिवार प्रभावित होते हैं, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी और नेता अपनी जवाबदेही से बच जाते हैं।
पप्पू यादव के मुताबिक, बाढ़ को प्राकृतिक आपदा बताकर प्रशासनिक लापरवाही को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। समय रहते बांधों की मरम्मत, कटाव रोकने के उपाय और राहत व्यवस्था मजबूत की जाए तो नुकसान कम किया जा सकता है।
बाढ़ राहत राशि में गड़बड़ी का आरोप
पप्पू यादव ने आरोप लगाया कि बाढ़ नियंत्रण और कटाव रोकने के लिए जारी सरकारी राशि का सही इस्तेमाल नहीं हो रहा है। उन्होंने निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और ठेकेदारों को किए जाने वाले भुगतान पर भी सवाल उठाए।
उन्होंने मांग की कि जिन ठेकेदारों की गड़बड़ी सामने आती है, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाए और उन्हें भविष्य में सरकारी काम देने से रोका जाए। इसके साथ ही प्रभावित परिवारों को 20-20 लाख रुपये मुआवजा देने की मांग की।
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पुलों के गिरने और सरकारी खर्च पर भी निशाना
बिहार में पुलों के गिरने और निर्माण कार्यों की खराब गुणवत्ता को लेकर भी सांसद ने सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि सरकारी योजनाओं पर करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद निर्माण कार्यों में लापरवाही सामने आती है। ऐसे मामलों में जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय होनी चाहिए।
उन्होंने महंगे पंडालों और आयोजनों पर होने वाले खर्च को लेकर भी सवाल उठाए। उनका कहना था कि सार्वजनिक संसाधनों का इस्तेमाल शिक्षा, स्वास्थ्य और आम लोगों की जरूरतों को पूरा करने के लिए होना चाहिए। पप्पू यादव के इन बयानों के बाद बिहार की कानून-व्यवस्था, अवैध शराब कारोबार और सरकारी योजनाओं में कथित भ्रष्टाचार को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो सकती है। हालांकि, उनके आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

