छतरपुर: मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले की बड़ा मलहरा विधानसभा सीट से कांग्रेस विधायक साध्वी रामसिया भारती के विधायक प्रतिनिधि इंदल सिंह लोधी विवादों में घिर गए हैं। आरोप है कि उन्होंने अपने आधिकारिक लेटरहेड पर भारत के राष्ट्रीय प्रतीक अशोक स्तंभ के साथ मध्य प्रदेश विधानसभा का आधिकारिक लोगो भी प्रिंट कराया और इसी लेटरहेड का इस्तेमाल करते हुए एक पटवारी के स्थानांतरण की सिफारिश जिला कलेक्टर से की।
मामला सामने आने के बाद प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। शिकायतकर्ताओं ने राष्ट्रीय प्रतीक के कथित अनधिकृत इस्तेमाल को गंभीर मामला बताते हुए जांच और कानूनी कार्रवाई की मांग की है।
कलेक्टर को भेजा गया था ट्रांसफर संबंधी पत्र
जानकारी के मुताबिक, 10 सितंबर को विधायक प्रतिनिधि इंदल सिंह लोधी के लेटरहेड से छतरपुर कलेक्टर को पत्र क्रमांक 136/26 भेजा गया था। पत्र में एक पटवारी के स्थानांतरण की सिफारिश की गई थी।
11 सितंबर को यह पत्र सामने आने के बाद लेटरहेड पर बने अशोक स्तंभ और मध्य प्रदेश विधानसभा के लोगो को लेकर आपत्ति जताई गई। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि विधायक प्रतिनिधि को इस तरह राष्ट्रीय प्रतीक और आधिकारिक सरकारी प्रतीकों का इस्तेमाल करने का अधिकार नहीं है।
विधायक ने कहा- जानकारी नहीं थी, प्रतिनिधि को हटाएंगे
विवाद बढ़ने के बाद बड़ा मलहरा विधायक साध्वी रामसिया भारती ने मामले से अनभिज्ञता जताई। उन्होंने कहा कि उन्हें अपने प्रतिनिधि द्वारा इस तरह के लेटरहेड के इस्तेमाल की जानकारी नहीं थी।
विधायक ने मामले को संज्ञान में लेते हुए इंदल सिंह लोधी को विधायक प्रतिनिधि के पद से हटाने की बात कही है। इसके बाद इंदल सिंह अब विधायक के प्रतिनिधि के तौर पर कार्य नहीं करेंगे।
कांग्रेस जिलाध्यक्ष ने भी जताई नाराजगी
मामले को लेकर कांग्रेस के छतरपुर जिलाध्यक्ष गगन यादव ने भी नाराजगी जताई है। उन्होंने कहा कि इस तरह की गलती को पार्टी स्वीकार नहीं करती। उनके मुताबिक, मामले की समीक्षा के बाद संगठन स्तर पर भी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
जिलाध्यक्ष ने यह भी कहा कि यदि इंदल सिंह लोधी के पास पार्टी का कोई संगठनात्मक दायित्व है, तो उसे भी समाप्त करने पर निर्णय लिया जाएगा।
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राष्ट्रीय प्रतीक के इस्तेमाल को लेकर क्या है नियम?
भारत के राजकीय प्रतीक के इस्तेमाल को लेकर State Emblem of India Act, 2005 और इससे जुड़े नियमों में प्रावधान किए गए हैं। राष्ट्रीय प्रतीक का इस्तेमाल निर्धारित सरकारी और संवैधानिक उद्देश्यों तथा अधिकृत व्यक्तियों/संस्थाओं तक सीमित है।
विधायक प्रतिनिधि स्वयं निर्वाचित संवैधानिक पदाधिकारी नहीं होते। ऐसे में उनके निजी या प्रतिनिधि लेटरहेड पर राष्ट्रीय प्रतीक के इस्तेमाल की वैधता जांच का विषय बन गई है।
हालांकि, किसी मामले में कानून की कौन-सी धाराएं लागू होंगी और दंड का प्रावधान किस परिस्थिति में प्रभावी होगा, यह संबंधित तथ्यों और सक्षम प्राधिकारी की जांच पर निर्भर करता है।
अब जांच पर टिकी नजर
फिलहाल प्रशासनिक स्तर पर यह पता लगाया जाना अहम है कि संबंधित लेटरहेड का इस्तेमाल कब से किया जा रहा था और इसके माध्यम से कितने पत्र सरकारी अधिकारियों को भेजे गए।
साथ ही, यह भी जांच का विषय रहेगा कि राष्ट्रीय प्रतीक और विधानसभा के लोगो का इस्तेमाल किस उद्देश्य से किया गया और क्या इससे किसी सरकारी प्रक्रिया या अधिकारी पर प्रभाव डालने का प्रयास हुआ।


