स्टॉकहोम: बेल्जियम में जन्मे अमेरिकी वैज्ञानिक फ्रांसिस हैल्जेन को 2026 का भौतिकी का नोबेल पुरस्कार दिया गया है। उन्हें अंतरिक्ष से धरती तक आने वाले बेहद ताकतवर न्यूट्रिनो का पता लगाने और उनके अध्ययन में अहम योगदान के लिए यह सम्मान मिला है।
फ्रांसिस हैल्जेन ने दक्षिणी ध्रुव की बर्फ में न्यूट्रिनो का पता लगाने वाली आइसक्यूब ऑब्जर्वेटरी बनाने का विचार दिया था। यह वेधशाला बर्फ के अंदर मौजूद सेंसरों की मदद से अंतरिक्ष से आने वाले न्यूट्रिनो का अध्ययन करती है।
स्टॉकहोम में सम्मानित किया जाएगा
नोबेल पुरस्कार के विजेताओं को दिसंबर में स्वीडन की राजधानी स्टॉकहोम में सम्मानित किया जाएगा। इस दौरान उन्हें मेडल, डिप्लोमा और पुरस्कार राशि प्रदान की जाएगी।
साल 2026 में नोबेल पुरस्कार की राशि करीब 11.5 करोड़ रुपये बताई गई है। फ्रांसिस हैल्जेन को यह सम्मान अंतरिक्ष और न्यूट्रिनो विज्ञान के क्षेत्र में उनके महत्वपूर्ण योगदान के लिए दिया गया है।
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कुछ अलग करना चाहते थे फ्रांसिस हैल्जेन
फ्रांसिस हैल्जेन ने 1987 में न्यूट्रिनो पर काम शुरू किया, तब वे इस क्षेत्र के बड़े विशेषज्ञ नहीं थे। उन्होंने खुद बताया है कि उस समय उन्होंने न्यूट्रिनो से जुड़ी बहुत सारी किताबें और शोध नहीं पढ़े थे। आगे चलकर यही बात उनके लिए फायदेमंद साबित हुई।
उस समय वैज्ञानिकों के सामने बड़ी चुनौती थी कि अंतरिक्ष से आने वाले बेहद ज्यादा ऊर्जा वाले न्यूट्रिनो को पकड़ा कैसे जाए। न्यूट्रिनो दूसरे पदार्थों के साथ बहुत कम टकराते हैं, इसलिए उन्हें पकड़ना बेहद मुश्किल होता है। इसके लिए बहुत बड़े डिटेक्टर की जरूरत थी।
हैल्जेन ने इस समस्या को दूसरे तरीके से देखा। उन्होंने सोचा कि दक्षिणी ध्रुव के नीचे मौजूद साफ और गहरी बर्फ का इस्तेमाल ही एक विशाल डिटेक्टर की तरह क्यों न किया जाए। अगर बर्फ के अंदर सेंसर लगाए जाएं, तो न्यूट्रिनो के किसी परमाणु से टकराने पर पैदा होने वाली बेहद हल्की चमक को पकड़ा जा सकता है।
अगर हैल्जेन उस समय इस क्षेत्र की सारी मुश्किलों और पहले हो चुके असफल प्रयोगों के बारे में बहुत ज्यादा जानते होते, तो शायद उन्हें भी यह काम असंभव या बेहद मुश्किल लगता। लेकिन उन्होंने इन बातों से पीछे हटने के बजाय अपने विचार को आजमाने का फैसला किया।

