नई दिल्ली: मतदाता सूची की विशेष गहन समीक्षा (SIR) को लेकर जारी सियासी टकराव के बीच 124 पूर्व आईएएस और आईएफएस अधिकारियों ने चुनाव आयोग के समर्थन में खुला पत्र जारी किया है। अधिकारियों ने चुनाव में धांधली के आरोपों पर सवाल उठाते हुए कहा कि किसी भी आरोप को साबित करने के लिए ठोस सबूत जरूरी हैं। उनका कहना है कि बिना प्रमाण बार-बार चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठाने से लोकतंत्र में जनता का भरोसा कमजोर होता है।
यह पत्र ऐसे समय आया है, जब मतदाता सूची के सत्यापन को लेकर विपक्षी दल और नागरिक समाज के कई समूह चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहे हैं। एसआईआर के तहत मतदाता सूची में संशोधन और पात्र मतदाताओं के नाम सुरक्षित रखने को लेकर राजनीतिक बहस तेज है। ऐसे में पूर्व अधिकारियों का खुला पत्र इस विवाद में चुनाव आयोग के समर्थन में सामने आया है।
‘हम किसी राजनीतिक दल से जुड़े नहीं हैं’
पूर्व अधिकारियों ने पत्र में कहा कि उन्होंने अपने पूरे करियर में चुनाव कराने, मतदाता सूचियां तैयार करने, मतदान कर्मियों को प्रशिक्षण देने, स्ट्रॉन्ग रूम सील करने और मतगणना की निगरानी जैसे काम किए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे किसी राजनीतिक दल से जुड़े नहीं हैं। अपने चुनावी अनुभव के आधार पर उन्होंने कहा कि धांधली जैसे गंभीर आरोप बिना सबूत नहीं लगाए जाने चाहिए।
बिहार चुनाव का हवाला, बूथ कैप्चरिंग का किया जिक्र
पत्र में बिहार में चुनाव के पुराने दौर का उल्लेख करते हुए अधिकारियों ने बूथ कैप्चरिंग, हथियारों के दम पर मतदाताओं को डराने और मतपेटियों में जबरन वोट डालने जैसी घटनाओं की याद दिलाई। उन्होंने कहा कि बूथ कैप्चरिंग को 1989 में कानून के तहत अपराध घोषित किया गया था।
अधिकारियों ने 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव का उदाहरण देते हुए दावा किया कि वहां दोबारा मतदान की जरूरत नहीं पड़ी। उन्होंने यह भी कहा कि बिहार में 1951 के बाद सबसे अधिक मतदान दर्ज किया गया और महिलाओं ने रिकॉर्ड संख्या में वोट डाले।
‘सवाल उठाना अधिकार, लेकिन आरोप के लिए सबूत जरूरी’
पूर्व अधिकारियों ने कहा कि चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाना हर नागरिक का अधिकार है, लेकिन आरोप लगाने वाले को उन्हें साबित करने के लिए प्रमाण भी देने चाहिए। इसके लिए कानून में निर्धारित प्रक्रियाएं मौजूद हैं। इनमें शपथपत्र के साथ मतदाता सूची पर आपत्ति दर्ज कराना और हाईकोर्ट में चुनाव याचिका दाखिल करना शामिल है।
पत्र में कहा गया कि प्रेस कॉन्फ्रेंस में लगाए गए ऐसे आरोप, जिन्हें शपथ के साथ प्रस्तुत नहीं किया गया हो, उनकी जांच और जवाबदेही तय करना मुश्किल बना सकते हैं। अधिकारियों के मुताबिक, संदेह अपने आप में सबूत नहीं होता।
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क्या है SIR, जिस पर छिड़ा है विवाद?
विशेष गहन समीक्षा यानी एसआईआर चुनाव आयोग की ओर से मतदाता सूची के सत्यापन और संशोधन की प्रक्रिया है। इसके तहत दोहरी प्रविष्टियों, मृत मतदाताओं और स्थायी रूप से दूसरी जगह जा चुके लोगों के रिकॉर्ड की जांच की जाती है, ताकि मतदाता सूची को अद्यतन रखा जा सके।
हालांकि, विपक्षी दलों और नागरिक समाज के समूहों ने इस प्रक्रिया के दौरान पात्र मतदाताओं के नाम हटने की आशंका, सत्यापन के तरीकों और मताधिकार की सुरक्षा को लेकर सवाल उठाए हैं। चुनाव आयोग मतदाता सूची को दुरुस्त करने की जरूरत पर जोर देता रहा है। इसी मुद्दे पर जारी राजनीतिक टकराव के बीच 124 पूर्व अधिकारियों का पत्र चर्चा में आया है।

