Tuesday, June 2, 2026
Contact: +91 97559 93555
Email: tathyawani@gmail.com
spot_img
Hometrending newsशब्दों की मर्यादा लांघती राजनीति

शब्दों की मर्यादा लांघती राजनीति

मप्र की राजनीति इन दिनों मुद्दों से अधिक शब्दों के युद्ध का अखाड़ा बनती जा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी के बीच हाल ही में हुई बयानबाजी इसका ताजा उदाहरण है। मुख्यमंत्री द्वारा पटवारी को ‘दो कौड़ी का प्रदेशाध्यक्ष’ और ‘टपोरी लाल’ कहना न केवल राजनीतिक शिष्टाचार की सीमाओं को लांघता है, बल्कि लोकतांत्रिक संवाद की गरिमा पर भी प्रश्नचिह्न लगाता है। विवाद की शुरुआत तब हुई जब जीतू पटवारी ने मुख्यमंत्री को ‘मोहन लाल अभिनंदन यादव’ कहकर संबोधित किया। यह टिप्पणी राजनीतिक व्यंग्य का हिस्सा हो सकती है, लेकिन इसके जवाब में मुख्यमंत्री द्वारा इस्तेमाल की गई भाषा ने बहस को और अधिक व्यक्तिगत तथा कटु बना दिया। शाजापुर के एक कार्यक्रम में मुख्यमंत्री का यह कहना कि ‘हम अभिनंदन लाल हैं तो तुम टपोरी लाल हो’, राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता को स्वस्थ बहस से हटाकर व्यक्तिगत आरोप-प्रत्यारोप की दिशा में ले जाता है। लोकतंत्र में विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच मतभेद स्वाभाविक हैं। तीखी आलोचना भी लोकतांत्रिक व्यवस्था का हिस्सा है। लेकिन जब जनप्रतिनिधि एक-दूसरे के लिए अपमानजनक शब्दों का प्रयोग करने लगते हैं, तब जनता के बीच राजनीति की छवि भी प्रभावित होती है। आम नागरिक अपने नेताओं से अपेक्षा करता है कि वे समस्याओं, नीतियों और विकास के मुद्दों पर चर्चा करें, न कि व्यक्तिगत टिप्पणियों के जरिए राजनीतिक स्तर को नीचे गिराएं। यह भी याद रखना चाहिए कि मुख्यमंत्री और प्रदेशाध्यक्ष जैसे पद केवल व्यक्तियों का नहीं, बल्कि संस्थाओं और लोकतांत्रिक मूल्यों का प्रतिनिधित्व करते हैं। ऐसे पदों पर बैठे लोगों के शब्द समाज के लिए संदेश बनते हैं। यदि शीर्ष नेतृत्व ही मर्यादा का पालन नहीं करेगा तो राजनीतिक कार्यकर्ताओं और समर्थकों से संयम की अपेक्षा करना कठिन होगा। आज आवश्यकता इस बात की है कि राजनीतिक दल चुनावी प्रतिस्पर्धा और वैचारिक संघर्ष को व्यक्तिगत कटाक्षों से अलग रखें। लोकतंत्र की ताकत संवाद, तर्क और जनहित के मुद्दों में निहित है। शब्दों की मर्यादा टूटेगी तो राजनीति की ऊंचाई भी स्वतः घटेगी। नेताओं को यह समझना होगा कि जनता को नारे और तंज नहीं, बल्कि समाधान और सकारात्मक नेतृत्व चाहिए।

RELATED ARTICLES

ई-पेपर

Bhopal- 24 to 30 May 2026
Bhopal- 17 to 23 May 2026

शासकीय निविदाएं

विज्ञापन