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दमदार एक्शन, शानदार विजुअल्स… लेकिन कहानी में कमजोर पड़ गई आलिया भट्ट की ‘अल्फा’

मुबंई। यशराज फिल्म्स के स्पाई यूनिवर्स की बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘अल्फा’ आखिरकार सिनेमाघरों में रिलीज हो गई है। फिल्म में आलिया भट्ट, शरवरी, बॉबी देओल, अनिल कपूर और दिया मिर्जा प्रमुख भूमिकाओं में नजर आते हैं। निर्देशक शिव रवैल ने इसे बड़े कैनवास पर इंटरनेशनल स्पाई थ्रिलर के अंदाज में पेश करने की कोशिश की है। फिल्म तकनीकी रूप से प्रभावशाली है, लेकिन कहानी और स्क्रीनप्ले उम्मीद के मुताबिक असर नहीं छोड़ पाते।

कारगिल युद्ध से शुरू होती है मिशन ‘अल्फा’ की कहानी

बता दें फिल्म की शुरुआत 1999 के कारगिल युद्ध के बाद होती है। युद्ध से बचकर लौटे दो सैन्य अधिकारी विक्रांत कौल (अनिल कपूर) और फतेह सिंह लाखावत (बॉबी देओल) एक ऐसी सीक्रेट फोर्स तैयार करने का सपना देखते हैं, जो देश के सबसे खतरनाक मिशनों को अंजाम दे सके। इसके लिए एक विशेष ‘अल्फा सीरम’ तैयार किया जाता है, जो सैनिकों की ताकत, गति और रिकवरी क्षमता को असाधारण स्तर तक बढ़ा देता है।

कहानी तब नया मोड़ लेती है जब विक्रांत अपनी गर्भवती पत्नी जानकी (दिया मिर्जा) की जान बचाने के लिए यही सीरम इस्तेमाल कर देता है। इसके बाद हालात पूरी तरह बदल जाते हैं। सालों बाद उनकी बेटी सीता (आलिया भट्ट) एक प्रशिक्षित स्पाई एजेंट के रूप में सामने आती है, जिसे फतेह सिंह ने तैयार किया है। लेकिन जैसे-जैसे सच सामने आता है, सीता को एहसास होता है कि उसका सबसे बड़ा दुश्मन वही व्यक्ति है, जिसे वह अपना मार्गदर्शक मानती रही। इसी दौरान शरवरी की एंट्री होती है और कहानी ‘मिशन ओडिसी’ के इर्द-गिर्द तेज रफ्तार पकड़ती है।

बॉबी देओल ने मारी बाजी

फिल्म में सबसे प्रभावशाली प्रदर्शन बॉबी देओल का है। उनके किरदार में रहस्य, गंभीरता और खामोशी का बेहतरीन संतुलन देखने को मिलता है। ग्रे-शेड वाले किरदार में वह हर बार स्क्रीन पर अलग प्रभाव छोड़ते हैं।

आलिया भट्ट ने एक्शन सीक्वेंस में मेहनत की है और कई दृश्यों में प्रभावशाली भी लगती हैं। हालांकि, एक स्पाई एजेंट के किरदार में जिस रौब और स्वैग की उम्मीद थी, वह हर दृश्य में नजर नहीं आता।

शरवरी को सीमित स्क्रीन स्पेस मिला है, लेकिन उन्होंने अपने हिस्से के किरदार को ईमानदारी से निभाया है।

अनिल कपूर अपने अनुभव के दम पर किरदार को मजबूती देते हैं, जबकि अंत में ऋतिक रोशन का कैमियो स्पाई यूनिवर्स के अगले अध्याय की झलक देता है।

शानदार विजुअल्स, लेकिन कहानी कमजोर

निर्देशक शिव रवैल ने फिल्म को इंटरनेशनल लुक देने में काफी मेहनत की है।

फिल्म की प्रमुख खूबियां—

  • बड़े पैमाने पर फिल्माए गए एक्शन सीक्वेंस
  • शानदार सिनेमैटोग्राफी
  • इंटरनेशनल लोकेशंस
  • हाई-प्रोडक्शन वैल्यू
  • स्टाइलिश विजुअल प्रेजेंटेशन

हालांकि, फिल्म की सबसे बड़ी कमजोरी इसकी राइटिंग है।

  • कई घटनाएं जल्दबाजी में आगे बढ़ती हैं।
  • कुछ ट्विस्ट प्रभाव छोड़ते हैं, लेकिन उनकी तैयारी कमजोर लगती है।
  • टाइमलाइन कई जगह भ्रम पैदा करती है।
  • भावनात्मक दृश्यों में गहराई की कमी महसूस होती है।

फिल्म का बैकग्राउंड स्कोर एक्शन को मजबूती देता है, लेकिन गानों में कोई ऐसा ट्रैक नहीं है जो लंबे समय तक याद रह सके। एक्शन सीक्वेंस बड़े पर्दे पर मनोरंजक हैं, हालांकि कुछ जगह जरूरत से ज्यादा सिनेमाई स्वतंत्रता ली गई है।

फाइनल वर्डिक्ट

‘अल्फा’ एक ऐसी फिल्म है जो अपने शानदार विजुअल्स, दमदार एक्शन और बॉबी देओल की प्रभावशाली परफॉर्मेंस के कारण देखने लायक बनती है। लेकिन यदि आप ‘एक था टाइगर’, ‘वॉर’ या ‘पठान’ जैसी मजबूत कहानी और रोमांच की उम्मीद लेकर थिएटर जा रहे हैं, तो फिल्म पूरी तरह संतुष्ट नहीं कर पाएगी। यशराज स्पाई यूनिवर्स के प्रशंसकों और एक्शन फिल्मों के शौकीनों के लिए यह एक बार देखी जा सकने वाली फिल्म है, लेकिन कमजोर स्क्रीनप्ले इसे यादगार बनने से रोक देता है।

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