नई दिल्ली: NEET-UG 2026 परीक्षा रद्द होने के बाद देशभर के लाखों मेडिकल अभ्यर्थियों में असमंजस की स्थिति है। इसी बीच संसद की एक समिति ने परीक्षा व्यवस्था में सुधार को लेकर बड़ा सुझाव दिया है। समिति ने कहा है कि भविष्य में NEET परीक्षा को कंप्यूटर आधारित टेस्ट (CBT) मोड में आयोजित किया जाना चाहिए। समिति का मानना है कि केवल सुरक्षा बढ़ाने से पेपर लीक और गड़बड़ी नहीं रुकेगी, बल्कि पूरी परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार की जरूरत है।
NTA की जवाबदेही तय करने पर जोर
संसदीय समिति ने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी यानी NTA के कामकाज पर भी सवाल उठाए हैं। समिति ने सुझाव दिया है कि ऐसी व्यवस्था बनाई जाए, जिससे NTA को संसद के प्रति जवाबदेह बनाया जा सके।
परीक्षा आयोजित करने वाली एजेंसी की जिम्मेदारी केवल परीक्षा कराना नहीं, बल्कि पूरी प्रक्रिया को निष्पक्ष और सुरक्षित रखना भी है।
IIT और AIIMS के विशेषज्ञों की मदद लेने का सुझाव
समिति ने परीक्षा के प्रश्नपत्र तैयार करने और उनके अनुवाद के लिए देश के प्रमुख शिक्षण संस्थानों के विशेषज्ञों की मदद लेने की सिफारिश की है।
इसमें IIT, AIIMS और IIM जैसे संस्थानों के विशेषज्ञ शामिल हो सकते हैं। इससे प्रश्नपत्रों की गुणवत्ता बेहतर बनाने और गलतियों को कम करने में मदद मिल सकती है।
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छात्रों के भविष्य पर पड़ता है असर
NEET देश की सबसे महत्वपूर्ण प्रवेश परीक्षाओं में से एक है। इसके जरिए मेडिकल कॉलेजों में दाखिला मिलता है। ऐसे में परीक्षा रद्द होने या किसी गड़बड़ी के सामने आने से लाखों छात्रों की तैयारी और भविष्य प्रभावित होता है। समिति की सिफारिशों का उद्देश्य परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ाना और छात्रों का भरोसा मजबूत करना है।
हालांकि, NEET को कंप्यूटर आधारित करने का अभी अंतिम फैसला नहीं हुआ है। अब देखना होगा कि केंद्र सरकार इन सुझावों पर क्या कदम उठाती है।

