नई दिल्ली: दिल्ली के जंतर-मंतर पर SIR यानी मतदाता सूची के Special Intensive Revision को लेकर हुए विरोध प्रदर्शन के बाद दिल्ली पुलिस ने तीन FIR दर्ज की हैं। ये FIR पार्लियामेंट स्ट्रीट और कनॉट प्लेस थाने में दर्ज की गई हैं। पुलिस के मुताबिक मामले BNS की धारा 223 के तहत दर्ज किए गए हैं।
शुक्रवार, 2 अक्टूबर को कई राजनीतिक दलों, छात्र संगठनों और सिविल सोसाइटी से जुड़े लोग जंतर-मंतर पहुंचने की कोशिश कर रहे थे। प्रदर्शनकारी SIR में कथित गड़बड़ियों को लेकर सवाल उठा रहे थे और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे थे।
प्रदर्शन से पहले ही लगा दी गई थी रोक
दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी थी। नई दिल्ली में BNSS की धारा 163 के तहत प्रतिबंध भी लागू किए गए थे। सुरक्षा को देखते हुए जंतर-मंतर और आसपास के इलाकों में बैरिकेडिंग की गई और बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी तैनात रहे। कई रास्तों पर आवाजाही भी प्रभावित हुई।
सुरक्षा व्यवस्था का असर दिल्ली मेट्रो पर भी पड़ा। जंतर-मंतर के आसपास 11 मेट्रो स्टेशनों पर कुछ समय के लिए एंट्री और एग्जिट बंद रखी गई, हालांकि प्रमुख इंटरचेंज स्टेशनों पर ट्रेन बदलने की सुविधा जारी रही।
करीब 1,000 लोगों को हिरासत में लेने की बात
पुलिस कार्रवाई के दौरान दिल्ली के अलग-अलग हिस्सों से बड़ी संख्या में लोगों को हिरासत में लिया गया। हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक करीब 1,000 लोगों को हिरासत में लिया गया। वहीं दिन के अलग-अलग समय पर सामने आए पुलिस आंकड़ों में संख्या कम-ज्यादा बताई गई थी।
हिरासत में लिए गए लोगों में आम आदमी पार्टी और दूसरे विपक्षी दलों के नेताओं के साथ छात्र संगठनों तथा सामाजिक संगठनों से जुड़े लोग भी शामिल थे। इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक आतिशी, संजय सिंह, मनोज झा, योगेंद्र यादव और AISA की नेहा बोरा सहित कई लोगों को पुलिस ने हिरासत में लिया था।
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अब 3 FIR के बाद बढ़ा मामला
प्रदर्शन खत्म होने के बाद मामला कानूनी कार्रवाई तक पहुंच गया। पुलिस ने तीन FIR दर्ज की हैं। पुलिस का कहना है कि प्रतिबंध के बावजूद लोगों के जमा होने के कारण कार्रवाई की गई। FIR में BNS की धारा 223 लगाई गई है, जो किसी सरकारी अधिकारी की ओर से जारी वैध आदेश की अवहेलना से जुड़ी है।
दूसरी ओर प्रदर्शन में शामिल नेताओं और संगठनों का कहना है कि वे चुनाव प्रक्रिया और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों पर जवाबदेही की मांग कर रहे हैं। इस पूरे घटनाक्रम के बाद SIR को लेकर चल रहा विवाद एक बार फिर राजनीतिक चर्चा के केंद्र में आ गया है।

