मुंबई: छात्र प्रदर्शन समाप्त होने के बाद बॉलीवुड के वरिष्ठ अभिनेता अनुपम खेर ने आंदोलन के दौरान इस्तेमाल की गई भाषा को लेकर अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में विरोध और सवाल जरूरी हैं, लेकिन अपनी बात रखने के दौरान भाषा की मर्यादा बनाए रखना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
अनुपम खेर ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट पर एक वीडियो साझा करते हुए कहा कि लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत लोगों की आवाज है, लेकिन उसकी सबसे बड़ी खूबसूरती संवाद की भाषा है। उन्होंने लिखा कि असहमति लोकतंत्र का हिस्सा है और सरकारों से सवाल पूछना भी जरूरी है, लेकिन भाषा का स्तर गिरने से मुद्दों की गंभीरता कम हो जाती है।
उन्होंने कहा, ‘विचारों का संघर्ष हो सकता है, लेकिन शब्दों का पतन नहीं होना चाहिए। मतभेद रखें, लेकिन मर्यादा भी बनाए रखें। एक सभ्य समाज की पहचान केवल उसके विचारों से नहीं, बल्कि उन्हें व्यक्त करने के तरीके से भी होती है।’
प्रधानमंत्री मोदी को लेकर इस्तेमाल हुई भाषा पर जताई नाराजगी
वीडियो में अनुपम खेर ने कहा कि, आंदोलन के दौरान एक बात ने उन्हें काफी दुख पहुंचाया। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ इस्तेमाल की गई कथित आपत्तिजनक भाषा पर सवाल उठाते हुए कहा कि किसी भी निर्वाचित पद की गरिमा का सम्मान किया जाना चाहिए।
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उन्होंने कहा कि, किसी भी नेता की नीतियों की आलोचना करना, सवाल पूछना और असहमति जताना लोकतंत्र की आत्मा है, लेकिन जब तर्क की जगह अपशब्द लेने लगते हैं तो संवाद की जगह केवल विवाद रह जाता है।
विरोध करें, लेकिन भाषा की गरिमा बनाए रखें
अनुपम खेर ने कहा कि, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लंबे समय से सार्वजनिक जीवन में हैं और जनता ने उन्हें कई बार अपना समर्थन दिया है। उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति के हर फैसले से सहमत होना जरूरी नहीं है, लेकिन संवैधानिक पदों की गरिमा बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है।
उन्होंने आगे कहा कि, चिंता इस बात की नहीं है कि किसी नेता का विरोध किया गया, बल्कि चिंता इस बात की है कि विरोध की भाषा किस स्तर तक पहुंच गई। उन्होंने कहा कि यह समस्या केवल युवाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज के हर वर्ग को अपनी भाषा और व्यवहार पर विचार करने की जरूरत है।
लोकतंत्र में सवाल जरूरी, लेकिन शब्दों की मर्यादा भी जरूरी
अभिनेता ने कहा कि लोकतंत्र में सवाल पूछना नागरिकों का अधिकार है, लेकिन शब्दों का चयन समाज की सोच और संस्कृति को दर्शाता है। उन्होंने अपील की कि आने वाली पीढ़ियों के लिए ऐसी संवाद संस्कृति विकसित की जाए, जहां असहमति के बावजूद सम्मान बना रहे।
उन्होंने अपने संदेश का अंत “जय हिंद” और “वंदे मातरम” के साथ किया।


