सुल्तानपुर: कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को मानहानि के 8 साल पुराने मामले में सुल्तानपुर की स्पेशल MP-MLA कोर्ट ने बरी कर दिया है। जज शुभम वर्मा की कोर्ट ने सोमवार को यह फैसला सुनाया। फैसले के वक्त राहुल गांधी खुद कोर्ट में मौजूद थे। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि शिकायतकर्ता पीड़ित पक्ष नहीं है और राहुल गांधी की टिप्पणी मानहानि की श्रेणी में नहीं आती।
2018 के बयान पर हुआ था केस
यह मामला 8 मई 2018 का है, जब कर्नाटक विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान राहुल गांधी बेंगलुरु में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर रहे थे। उस दौरान उन्होंने कहा था कि भाजपा के अध्यक्ष हत्या के आरोपी हैं। उस वक्त अमित शाह भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष थे। दरअसल, राहुल गांधी का इशारा सोहराबुद्दीन शेख एनकाउंटर केस की तरफ था, लेकिन अमित शाह को इस केस में 2014 में ही CBI की विशेष अदालत ने बरी कर दिया था।
इस बयान के बाद सुल्तानपुर के भाजपा नेता और जिला सहकारी बैंक के पूर्व अध्यक्ष विजय मिश्रा ने 4 अगस्त 2018 को राहुल गांधी के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दर्ज कराया था।
चौथी बार पेश हुए राहुल
राहुल गांधी इस केस में चौथी बार कोर्ट में पेश हुए। इससे पहले नवंबर 2023 में कोर्ट ने उन्हें तलब किया था और फिर जमानत दी थी। बीच में वॉइस सैंपल टेस्ट कराने की मांग भी कोर्ट ने खारिज कर दी थी।
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कोर्ट में ‘सत्यमेव जयते’
फैसला आते ही कोर्ट के बाहर मौजूद कांग्रेस कार्यकर्ताओं में खुशी की लहर दौड़ गई।

कांग्रेस ने सोशल मीडिया पर ‘सत्यमेव जयते’ पोस्ट कर फैसले का स्वागत किया। सुरक्षा के लिहाज से सुबह से ही कोर्ट परिसर में भारी पुलिस बल तैनात था।

