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आरबीआई की रिपोर्ट ने खोली मध्यप्रदेश की वित्तीय परतें, 20 साल में दस गुना उछला कर्ज

भोपाल। मध्यप्रदेश की आर्थिक स्थिति को लेकर भारतीय रिजर्व बैंक की हालिया रिपोर्ट ने एक गंभीर तस्वीर सामने रखी है। देश के कुल सार्वजनिक देनदारियों में से पांच प्रतिशत से अधिक हिस्सा अकेले इस राज्य पर होने का खुलासा वित्तीय प्रबंधन पर कई सवाल खड़े करता है। मार्च 2026 तक मध्यप्रदेश की कुल देनदारी बढ़कर 5.31 लाख करोड़ रुपये पहुंच चुकी है, जो वर्ष 2007 की तुलना में लगभग दस गुना अधिक है। लगभग दो दशकों में कर्ज का यह तेज विस्तार बताता है कि राज्य निरंतर उधारी के सहारे अपनी योजनाओं और दायित्वों को पूरा करता रहा है।
एक वर्ष में लिया 50 हजार करोड़ का कर्ज
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि केवल बीते एक वर्ष में ही मध्यप्रदेश पर 50 हजार करोड़ रुपये से अधिक अतिरिक्त कर्ज का बोझ बढ़ा है। वर्ष 2025 में देनदारी जहां 4.80 लाख करोड़ रुपये आंकी गई थी, वहीं मार्च 2026 तक यह आंकड़ा 5.31 लाख करोड़ रुपये पर जा पहुंचा। वित्त विशेषज्ञों के अनुसार, किसी भी राज्य के लिए एक वर्ष में इतनी बड़ी छलांग चिंताजनक मानी जाती है।
सरकार पर लाडली बहना पड़ रहीं भारी
सरकार का तर्क है कि यह कर्ज बुनियादी ढांचों और विकास कार्यों के लिए आवश्यक है। परन्तु “लाड़ली बहना योजना“ जैसे खर्च राज्य के खजाने पर भारी दबाव डाल रहे हैं। वर्तमान में इस योजना पर प्रतिमाह लगभग 1850 करोड़ रुपये खर्च हो रहे हैं, और आगामी वर्षों में इस राशि के और बढ़ने की घोषणा भी की जा चुकी है।
देश के अन्य बड़े राज्यों की तुलना में मध्यप्रदेश फिलहाल कर्ज के मामले में नौवें स्थान पर है, लेकिन कर्ज बढ़ने की रफ्तार विशेषज्ञों को आगामी वर्षों के वित्तीय संकट की आशंका दिखाती है। केंद्र सरकार ने उधारी की एक सीमा तय कर रखी है, जिसके पार राज्य कदम नहीं बढ़ा सकता, लेकिन जिस गति से कर्ज बढ़ रहा है, वह भविष्य के आर्थिक संतुलन को चुनौती दे सकता है।

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