ईओडब्ल्यू ने राइस मिलर, नान, मार्कफेड के अधिकारियों सहित 8 लोगों पर एफआईआर दर्ज
बालाघाट। भ्रष्टाचार चाहे कितना भी चरम सीमा लांघे कभी न कभी उजागर होना स्वाभाविक होता है। यह इसलिए कह रहे हैं कि बालाघाट जिले में सरकारी धान की चोरी और हो रहे करोड़ों के भ्रष्टाचार पर संबंधित विभाग के अधिकारियों द्वारा पर्दा डालकर करोड़ों की चोरी को सालों से जिस तरह अंजाम दिया जा रहा था। अब उससे पर्दा उठाते हुए ईओडब्ल्यू जबलपुर ने राइज मिल संचालक समीर सचदेव और पिता प्रकाश सचदेव सहित आठ लोगों पर भ्रष्टाचार अधिनियम के तहत एफआईआर दर्ज कर ली है।
आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (ईओडब्ल्यू) जबलपुर ने सरकारी धान की कस्टम मिलिंग में बड़े पैमाने पर हुई धांधली का पर्दाफाश करते हुए मार्कफेड, नागरिक आपूर्ति निगम के अधिकारियों और राइस मिल संचालकों पर गंभीर धाराओं में एफआईआर दर्ज की है। आरोप है कि कस्टम मिलिंग के नाम पर करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी की गई और शासन को भारी आर्थिक नुकसान पहुंचाया गया।
इन अधिकारियों और संचालकों पर गिरी ईओडब्ल्यू की गाज
-समीर सचदेव, संचालक, सचदेव राइस मिल, कोसमी, बालाघाट।
-प्रकाश सचदेव, प्रोप्राइटर, सचदेव राइस मिल, कोसमी बालाघाट।
-हीरेंद्र सिंह रघुवंशी, तत्कालीन जिला विपणन अधिकारी, मार्कफेड बालाघाट।
-विवेक तिवारी, वर्तमान जिला विपणन अधिकारी, मार्कफेड बालाघाट।
-हरीश कोरी, उप प्रबंधक (वित्त), मार्कफेड बालाघाट।
-अभिषेक निषाद, तत्कालीन उप प्रबंधक (वित्त), मार्कफेड बालाघाट।
-पीयूष माली, तत्कालीन जिला प्रबंधक, मप्र स्टेट सिविल सप्लाई कॉर्पोरेशन, बालाघाट।
-दुर्गेश बैस, कंप्यूटर ऑपरेटर (लेखापाल) (वित्त), मप्र स्टेट सिविल सप्लाई कॉर्पोरेशन।
यह है पूरा मामला
शिकायतकर्ता मिलिंद ठाकरे ने 27 दिसंबर 2024 को ईओडब्ल्यू जबलपुर में शिकायत की थी कि मार्कफेड व नागरिक आपूर्ति निगम के अधिकारियों ने सचदेव राइस मिल संचालकों के साथ मिलकर शासकीय धान की मिलिंग में हेराफेरी की है एवं सरकारी धान को दूसरे राज्यों में बेचा गया है। शिकायत के आधार पर ईओडब्ल्यू ने जांच की और जांच के दौरान कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए।
2 अप्रैल 2024 को सचदेव राइस मिल से धान से भरे ट्रक संदिग्ध रूप से महाराष्ट्र की ओर जाते पकड़े गए। ट्रक चालकों और परिवहन दस्तावेजों की संयुक्त जांच में पुष्टि हुई कि इन वाहनों पर शासकीय धान ही लोड था। इन ट्रकों के ओवरलोड होने पर परिवहन विभाग ने जुर्माना भी लगाया था। जांच में यह भी सामने आया कि सचदेव राईस मिल द्वारा ट्रकों पर शासकीय धान लोड किया गया था, जबकि मिल मालिक ने झूठा दावा किया कि ट्रक गलती से महाराष्ट्र सीमा तक पहुंचे। राइस मिल के संचालक समीर सचदेव द्वारा अपने कथन में यह कहा था कि दोनों ट्रक ड्रायवर नींद में 20 किमी की दूरी पार कर बॉर्डर पर गलती से पहुंच गए, लेकिन जांच में यह दावा झूठा साबित हुआ। मिलिंद ठाकरे की शिकायत पर कलेक्टर कार्यालय द्वारा जांच टीम गठित की गई और सचदेव राइस मिल की जांच अनुविभागीय अधिकारी के साथ चार सदस्यों की टीम ने की थी। जांच रिपोर्ट में यह पाया गया था कि सचदेव राइस मिल द्वारा शासकीय धान की मिलिंग कम की गई है, जिसकी पुष्टि मिलिंग की गई बिजली खपत अनुपात से हुई है।

अनुबंधों में भी मिलीं गंभीर अनियमितताएं
जांच में यह बात भी सामने आई कि राइस मिल संचालकों ने अपनी मिल की क्षमता बढ़ा-चढ़ाकर बताई और गलत जानकारी देकर अधिक लॉट का अनुबंध हासिल किया। मिलिंग के नाम पर जारी किए गए बिल भी वास्तविक मिलिंग से कई गुना अधिक पाए गए।
इसके अलावा
-मिल द्वारा गलत दस्तावेजों का सत्यापन कराया गया,
-बिलों का भुगतान वास्तविक कार्य से कहीं ज्यादा दिखाया गया,
-और शासन को करोड़ों की आर्थिक क्षति पहुंचाई गई।
भारी आर्थिक नुकसान का खुलासा
जांच में यह पाया गया कि इस आपराधिक षड्यंत्र के चलते 2.79 करोड़ रुपये का अवैध भुगतान किया गया, जिससे राज्य शासन को भारी नुकसान हुआ।
इन धाराओं में दर्ज हुआ अपराध
आरोपियों के खिलाफ-धारा 316(5), 338, 336(3), 340(2), 318(4), 61(2) बीएनएसएस 2023 तथा धारा 7(सी), 13(1)(ए), 13(2) भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 2018 के तहत अपराध दर्ज किया गया है। ईओडब्ल्यू की जांच फिलहाल जारी है एवं इसमें और भी नाम जुड़ सकते हैं जिसके बाद और नए खुलासे हो सकते हैं।

