नागपुर। महाराष्ट्र के नागपुर में चल रहे धार्मिक कार्यक्रम के बीच एक बयान ने सियासी और सामाजिक हलचल बढ़ा दी है। बागेश्वर धाम के प्रमुख धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री द्वारा छत्रपति शिवाजी महाराज को लेकर दिए गए कथित बयान पर विवाद गहराता जा रहा है। हालांकि, अब उन्होंने खुद सामने आकर इस पूरे मामले पर सफाई दी है और कहा है कि उनके शब्दों को गलत तरीके से पेश किया गया।
नागपुर आता हूं तो विवाद तय होता है
नागपुर में आयोजित दिव्य दरबार और रामकथा कार्यक्रम के दौरान धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि जब भी वे नागपुर आते हैं, किसी न किसी मुद्दे पर विवाद खड़ा हो जाता है। उन्होंने हल्के अंदाज में कहा कि यह अब लगभग तय हो गया है कि नागपुर आऊं और कोई लफड़ा न हो, ऐसा हो ही नहीं सकता।
विवाद पर सफाई देते हुए शास्त्री ने कहा कि छत्रपति शिवाजी महाराज उनके लिए प्रेरणा स्रोत हैं। उन्होंने कभी भी शिवाजी महाराज के प्रति अपमानजनक शब्द नहीं कहे और न ही ऐसा सोच सकते हैं। हमने हिंदुत्व की शिक्षा शिवाजी महाराज के आदर्शों से ही ली है। जिनके हिंदवी स्वराज से प्रेरणा लेकर हमने राष्ट्र का संकल्प लिया, उनका अपमान करने का सवाल ही नहीं उठता।
क्या था पूरा विवाद?
दरअसल, धीरेंद्र शास्त्री के एक बयान को लेकर विवाद खड़ा हुआ, जिसमें उन्होंने छत्रपति शिवाजी महाराज और संत समर्थ रामदास के संबंध को लेकर एक प्रसंग सुनाया था। इस कथा में उन्होंने गुरु-शिष्य परंपरा का जिक्र करते हुए बताया कि किस तरह शिवाजी महाराज ने अपने गुरु के प्रति समर्पण दिखाया था।
हालांकि, उनके इस कथन को कुछ लोगों ने गलत तरीके से समझा और इसे शिवाजी महाराज का अपमान बताया। इसके बाद महाराष्ट्र के कई हिस्सों में विरोध प्रदर्शन हुए और पुलिस में शिकायतें भी दर्ज कराई गईं।
धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि उन्होंने केवल एक धार्मिक कथा के माध्यम से गुरु-शिष्य परंपरा की महिमा बताने की कोशिश की थी। लेकिन कुछ लोगों ने उनके शब्दों का गलत अर्थ निकालकर विवाद खड़ा कर दिया। यह पूरी तरह से भाव का अनर्थ है और सच्चाई को तोड़-मरोड़कर पेश किया गया है।
कार्यक्रम में उमड़ी भीड़
वहीं नागपुर में चल रहे इस धार्मिक आयोजन में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। विवाद के बाद प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था भी बढ़ा दी है, ताकि किसी तरह की अप्रिय घटना न हो।
इस मुद्दे पर राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों की प्रतिक्रियाएं भी सामने आ रही हैं। जहां कुछ लोग शास्त्री के समर्थन में हैं, वहीं कई संगठन उनके बयान को लेकर कड़ी आपत्ति जता रहे हैं।

