मुंबई: भारत की करेंसी व्यवस्था में जल्द बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) देश में पहली बार बड़े स्तर पर ₹10 और ₹20 के पॉलीमर (प्लास्टिक) बैंकनोट जारी करने जा रहा है। केंद्र सरकार से मंजूरी मिलने के बाद RBI ट्रायल के तौर पर 100-100 करोड़ यानी कुल 200 करोड़ पॉलीमर नोट छापेगी।
सरकार का कहना है कि यह फिलहाल पायलट प्रोजेक्ट होगा। यदि इसका परिणाम सफल रहता है, तो भविष्य में अन्य मूल्यवर्ग के नोट भी पॉलीमर तकनीक में जारी किए जा सकते हैं। हालांकि, मौजूदा कागजी नोट पूरी तरह बंद नहीं होंगे और दोनों प्रकार की करेंसी एक साथ चलन में रहेगी।
बदलेगी भारतीय करेंसी की तस्वीर
लोकसभा में वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने जानकारी देते हुए कहा कि केंद्र सरकार ने पॉलीमर बैंकनोट्स के ट्रायल को मंजूरी दे दी है। इसके तहत ₹10 और ₹20 के नोटों की बड़े पैमाने पर टेस्ट प्रिंटिंग की जाएगी। इस पहल का उद्देश्य देश में ज्यादा टिकाऊ, सुरक्षित और आधुनिक करेंसी सिस्टम विकसित करना है।
पुराने कागजी नोट रहेंगे जारी
नई पॉलीमर करेंसी आने के बाद भी लोगों को अपने मौजूदा नोट बदलने की जरूरत नहीं होगी।
- कागजी और पॉलीमर दोनों नोट साथ-साथ चलेंगे।
- बदलाव चरणबद्ध तरीके से किया जाएगा।
- पुराने नोटों की वैधता बनी रहेगी।
- धीरे-धीरे जरूरत के अनुसार नए नोटों का सर्कुलेशन बढ़ाया जाएगा।
दुनिया के 60 से ज्यादा देशों में सफल है पॉलीमर करेंसी
बता दें ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, ब्रिटेन, न्यूजीलैंड समेत दुनिया के 60 से अधिक देशों में पॉलीमर नोट पहले से इस्तेमाल किए जा रहे हैं। इन देशों में इन नोटों ने टिकाऊपन और सुरक्षा के मामले में बेहतर परिणाम दिए हैं। भारत ने भी 2012 में इस तकनीक पर काम शुरू किया था, लेकिन तकनीकी कारणों से योजना आगे नहीं बढ़ सकी थी। अब RBI इसे नए स्वरूप में लागू करने की तैयारी कर रहा है।
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ग्लोबल टेंडर जारी
वहीं RBI की नोट प्रिंटिंग इकाई ने पॉलीमर सबस्ट्रेट शीट की सप्लाई के लिए वैश्विक स्तर पर Expression of Interest (EOI) जारी किया है। इस टेंडर के तहत दुनिया भर की कंपनियों से अत्याधुनिक सुरक्षा फीचर्स वाली पॉलीमर शीट उपलब्ध कराने के प्रस्ताव मांगे गए हैं। आवेदन की अंतिम तिथि 18 अगस्त तय की गई है।
क्यों खास होंगे पॉलीमर नोट?
पॉलीमर नोट सामान्य कागजी नोटों की तुलना में कई मामलों में बेहतर माने जाते हैं।
- पानी में भी खराब नहीं होते।
- धूल और गंदगी का असर कम होता है।
- जल्दी नहीं फटते।
- लंबे समय तक नए जैसे बने रहते हैं।
- नकली नोट बनाना बेहद मुश्किल होता है।
- एडवांस सिक्योरिटी फीचर्स जोड़ना आसान होता है।
नोट छापने का बढ़ता खर्च भी बना वजह
RBI की वार्षिक रिपोर्ट के मुताबिक, 2024-25 में नोटों की छपाई पर ₹6,372.8 करोड़ खर्च हुए, जबकि पिछले वित्त वर्ष में यह खर्च ₹5,101.4 करोड़ था। ऐसे में लंबे समय तक चलने वाले पॉलीमर नोट भविष्य में छपाई और रिप्लेसमेंट की लागत कम करने में भी मदद कर सकते हैं।
क्या है पॉलीमर बैंकनोट?
पॉलीमर बैंकनोट विशेष प्लास्टिक आधारित सब्सट्रेट पर तैयार किए जाते हैं। देखने और इस्तेमाल में ये सामान्य नोटों जैसे ही होते हैं, लेकिन इनकी मजबूती, सुरक्षा और लाइफ कागजी नोटों से कई गुना अधिक होती है।
RBI पहले ट्रायल के नतीजों का मूल्यांकन करेगी। यदि पॉलीमर नोट उम्मीदों पर खरे उतरते हैं, तो भविष्य में अन्य मूल्यवर्ग के नोट भी इसी तकनीक में जारी किए जा सकते हैं। फिलहाल देशवासियों को जल्द ही बाजार में ₹10 और ₹20 के नए पॉलीमर नोट देखने को मिल सकते हैं।

