सागर: यामिनी मौर्य सागर की बेटी और अंतरराष्ट्रीय जूडो खिलाड़ी ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में रजत पदक जीतकर देश और मध्य प्रदेश का नाम रोशन किया है। स्कॉटलैंड के ग्लासगो में आयोजित प्रतियोगिता में 57 किलोग्राम वर्ग में सिल्वर मेडल जीतने के बाद जब यामिनी अपने गृहनगर सागर पहुंचीं तो उनका भव्य स्वागत किया गया। परिजनों, खेल प्रेमियों और स्थानीय लोगों ने फूल-मालाओं और ढोल-नगाड़ों के साथ उनका अभिनंदन किया।
यामिनी की यह सफलता 18 वर्षों की कड़ी मेहनत और संघर्ष का परिणाम है। उन्होंने वर्ष 2008 में सागर खेल परिसर से कोच दीपक कुमार के मार्गदर्शन में जूडो की शुरुआत की थी। लगातार मेहनत के दम पर उन्होंने पहले राज्य, फिर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई। वर्तमान में वह कर्नाटक स्थित जेएसडब्ल्यू अकादमी में उच्च स्तरीय प्रशिक्षण ले रही हैं।
कॉमनवेल्थ में पदक जीतने से पहले भी यामिनी इतिहास रच चुकी हैं। वह वर्ल्ड यूनिवर्सिटी गेम्स में भारत के लिए पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला जूडो खिलाड़ी हैं। सागर पहुंचने पर उन्होंने कहा कि अब उनका पूरा फोकस सितंबर-अक्टूबर में जापान के नागोया में होने वाले एशियन गेम्स पर है, जहां वह भारत के लिए गोल्ड मेडल जीतने का सपना पूरा करना चाहती हैं।
यामिनी ने बुंदेलखंड की बेटियों को खेलों में आगे आने का संदेश देते हुए कहा कि किसी भी क्षेत्र में सफलता पाने के लिए लगातार मेहनत जरूरी है। उन्होंने लड़कियों से सेल्फ डिफेंस से जुड़े खेल सीखने और आत्मनिर्भर बनने की भी अपील की।
यामिनी की इस उपलब्धि पर उनके पिता हरिओम मौर्य ने खुशी जताते हुए कहा कि बेटी का अगला लक्ष्य ओलंपिक पदक जीतना है और पूरा परिवार उसके सपने को साकार होते देखना चाहता है। वहीं उनकी मां मिथलेश मौर्य ने कहा कि हर बेटी को अपनी प्रतिभा के अनुसार आगे बढ़ने का अवसर मिलना चाहिए।
इस अवसर पर नरयावली विधायक प्रदीप लारिया ने भी यामिनी का सम्मान किया। उन्होंने कहा कि यामिनी ने बुंदेलखंड, मध्य प्रदेश और पूरे देश का गौरव बढ़ाया है। उन्हें उम्मीद है कि एशियन गेम्स और ओलंपिक में भी यामिनी भारत के लिए पदक जीतकर नया इतिहास रचेंगी।

