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इंदौर के दूषित पानी पर नेता प्रतिपक्ष सिंघार का हमला: बोले- अफ्रीका के कस्बों जैसी हालत

इंदौर: शहर में दूषित पानी की समस्या और हाल ही में सामने आई जांच रिपोर्ट को लेकर नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने राज्य की भाजपा सरकार और इंदौर नगर निगम पर करारा हमला बोला है। उन्होंने सरकार पर जनप्रतिनिधियों को बचाने और रिपोर्ट को मैनिपुलेट (हेरफेर) करने का गंभीर आरोप लगाया है।

क्या जनता को साफ पानी पीने का अधिकार नहीं है?

उमंग सिंघार ने कहा कि इंदौर को भले ही स्वच्छता का अवार्ड लगातार मिलता रहा हो, लेकिन क्या यहां की जनता को साफ पीने का पानी पाने का अधिकार नहीं है? भारतीय संविधान का आर्टिकल 21 हमें मूलभूत सुविधाएं पाने का अधिकार देता है, जिन्हें मुहैया कराना नगरीय निकाय की जिम्मेदारी है। लेकिन साढ़े 8 हजार करोड़ के बजट वाले इंदौर नगर निगम, जहां भाजपा के मेयर, विधायक और सरकार है, वहां आज स्थिति अफ्रीका के छोटे-छोटे कस्बों जैसी देखने को मिल रही है।

8 महीने बाद भी दूषित पानी

नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि घटना के 8 महीने बीत जाने के बाद भी इंदौर में दूषित पानी आ रहा है और खुद नगर निगम की रिपोर्ट मानती है कि शहर के कई अस्पतालों में पानी साफ नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार इस रिपोर्ट को सार्वजनिक ही नहीं करना चाहती थी और विधानसभा में पीने के पानी को लेकर झूठ बोला गया।

जांच प्रक्रिया पर सवाल उठाए

जांच प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए सिंघार ने खुलासा किया कि- दूषित पानी मिलने की बात जांच में साबित हुई है, लेकिन पूरी परियोजना के ब्लू प्रिंट ही गायब कर दिए गए। जांच कर रहे सेवानिवृत्त जज को सरकार द्वारा सहयोग नहीं किया गया और उन्हें जरूरी दस्तावेज तक उपलब्ध नहीं कराए गए। ओवरहेड टैंक पर तैनात कर्मचारियों और पोटेशियम क्लोराइड मिलाने वाले से सख्ती से पूछताछ क्यों नहीं की गई? मेयर के पास 66 दिनों तक फाइल क्यों रुकी रही? क्या किसी कंपनी से लेनदेन को लेकर यह फाइल रोकी गई थी?

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लापरवाही के लिए आखिरकार कौन जिम्मेदार? 

सिंघार ने कहा कि आयोग की रिपोर्ट आने के बाद भी सरकार अब तक यह तय नहीं कर पाई कि इस पूरी लापरवाही के लिए आखिरकार कौन जिम्मेदार था। रिपोर्ट को मैनिपुलेट करके सिर्फ अधिकारियों की जिम्मेदारी तय कर दी गई, जबकि राजनीतिक जनप्रतिनिधियों को साफ बचा लिया गया।

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