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सिंघवी का पलटवार- “बेडरूम में प्रदर्शन” करना चाहिए, “सवाल पूछना देशद्रोह नहीं”

नई दिल्ली। देश की राजधानी में आयोजित AI इम्पैक्ट समिट अचानक राजनीतिक अखाड़ा बन गई, जब यूथ कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने मंच के बाहर शर्टलेस होकर विरोध दर्ज कराया। कुछ ही घंटों में यह प्रदर्शन सुर्खियों में आ गया और उसके बाद शुरू हुई कानूनी कार्रवाई ने विवाद को और हवा दे दी। कांग्रेस सांसद और वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने तीखे अंदाज़ में सरकार पर निशाना साधते हुए कहा-जवाबदेही मांगना अगर अपराध है, तो लोकतंत्र का मतलब क्या रह जाएगा?

 प्रदर्शन या ‘ओवररिएक्शन’?

मनु सिंघवी ने सवाल उठाते कहा कि- बिना हिंसा, बिना तोड़फोड़- सिर्फ टी-शर्ट उतारकर नारे लगाने को किस कानून के तहत देशद्रोह या आतंकवाद से जोड़ा जा सकता है? उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा- क्या विरोध सिर्फ चारदीवारी के अंदर, बेडरूम में किया जाना चाहिए?” उनके इस बयान ने सियासी बहस को और तेज कर दिया।

कानूनी जंग की तैयारी

वहीं कांग्रेस का कहना है कि यूथ कांग्रेस नेताओं पर लगाई गई धाराएं ‘अनुपात से बाहर’ हैं। पार्टी अब इस मुद्दे को अदालत में ले जाने की तैयारी में है। सिंघवी ने भरोसा जताया कि न्यायपालिका शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार को संवैधानिक नजरिए से देखेगी।

लोकतंत्र की असली परीक्षा?

AI जैसे भविष्यवादी और तकनीकी मंच पर हुआ यह विरोध केवल एक घटना नहीं, बल्कि लोकतंत्र में असहमति की सीमाओं पर बड़ा सवाल बन गया है। क्या सार्वजनिक मंच पर प्रतीकात्मक विरोध स्वीकार्य है? या सरकार की आलोचना को सख्ती से रोका जाएगा? फिलहाल, यह मुद्दा सियासत के केंद्र में है और आने वाले दिनों में संसद से अदालत तक इसकी गूंज सुनाई दे सकती है।

 

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