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राम मंदिर चंदा केस: सुप्रीम कोर्ट की सख्ती, फोरेंसिक ऑडिटर के साथ होगी नई SIT जांच

नई दिल्ली: अयोध्या राम मंदिर निर्माण के लिए मिले चंदे में कथित गबन के आरोपों की जांच को लेकर उत्तर प्रदेश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि उसने आईजीपी किरण एस. की अध्यक्षता में चार सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) का गठन कर दिया है। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने जांच को और अधिक पारदर्शी बनाने के लिए SIT में पांचवें सदस्य के रूप में एक फोरेंसिक ऑडिटर को शामिल करने का निर्देश दिया।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने कहा कि SIT दो सप्ताह के भीतर अपनी पहली स्टेटस रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी। अदालत ने स्पष्ट किया कि उसका उद्देश्य मामले की निष्पक्ष, त्वरित और पारदर्शी जांच सुनिश्चित करना है।

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट को बताया कि सुप्रीम कोर्ट के सुझाव के बाद 25 जुलाई को जारी अधिसूचना के जरिए SIT का गठन किया गया। टीम में IGP के अलावा DIG, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (ASP) स्तर के अधिकारी भी शामिल हैं।

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता देवदत्त कामत ने दलील दी कि जांच में राम मंदिर निर्माण के लिए देशभर से प्राप्त दान की रसीदों का ऑडिट भी कराया जाना चाहिए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि दान की राशि ट्रस्ट तक सही तरीके से पहुंची या नहीं।

इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जाएंगे और फिलहाल अदालत का पूरा ध्यान जांच की गुणवत्ता और निष्पक्षता पर है। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई दो सप्ताह बाद निर्धारित की है।

गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट उन याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा है, जिनमें राम मंदिर निर्माण के लिए मिले चंदे में कथित अनियमितताओं की जांच CBI से कराने की मांग की गई है। इससे पहले भी अदालत स्पष्ट कर चुकी है कि इस मामले का राजनीतिकरण नहीं होना चाहिए और इसकी निष्पक्ष जांच तार्किक निष्कर्ष तक पहुंचनी चाहिए।

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