नई दिल्ली: पाकिस्तान के कराची बंदरगाह पर छह भारतीय नाविक छह महीने से अधिक समय से फंसे हुए हैं। इनमें उत्तर प्रदेश के प्रयागराज निवासी विनीत किशोर मिश्रा भी शामिल हैं। उनके परिवार का कहना है कि नाविकों की घर वापसी को लेकर अब तक कोई स्पष्ट जानकारी नहीं मिली है। परिवार लगातार केंद्र सरकार और विदेश मंत्रालय से मदद की अपील कर रहा है।
विनीत मिश्रा के घर में उनकी पत्नी नेहा और दो बच्चे उनके लौटने का इंतजार कर रहे हैं। परिवार के लिए सबसे मुश्किल स्थिति बच्चों के सवालों का जवाब देना है। नेहा के मुताबिक, बच्चे बार-बार पूछते हैं कि उनके पिता घर कब आएंगे। वह उन्हें केवल इतना कह पाती हैं कि पापा जल्द आ जाएंगे।
छह महीने का अनुबंध खत्म, फिर भी नहीं हुई वापसी
विनीत 25 फरवरी को ‘केवर’ नाम के जनरल कार्गो जहाज पर चीफ ऑफिसर के रूप में सवार हुए थे। ईरान और ओमान के समुद्री रास्तों से गुजरने के बाद जहाज 17 अप्रैल को कराची बंदरगाह पहुंचा। इसके बाद से विनीत समेत छह भारतीय नागरिक वहीं फंसे हुए हैं।
विनीत की पत्नी नेहा के अनुसार, उनके पति छह महीने के अनुबंध पर काम कर रहे थे, जो अगस्त में समाप्त हो गया। उनका वीजा और अनुबंध खत्म होने के बावजूद उन्हें जहाज से साइन ऑफ नहीं किया गया। परिवार का आरोप है कि नाविकों की भारत वापसी के लिए अब तक कोई ठोस व्यवस्था नहीं की गई है।
जहाज पर बिजली और खाने की समस्या
परिवार ने नाविकों की स्थिति को लेकर गंभीर चिंता जताई है। नेहा का कहना है कि पिछले तीन महीनों से जहाज पर बिजली नहीं है। वहीं, विनीत के पिता ललित किशोर मिश्रा के अनुसार, जहाज पर खाने-पीने की व्यवस्था भी ठीक नहीं है।
परिवार का दावा है कि नाविकों को सुबह केवल दो बिस्कुट दिए जाते हैं, दोपहर का भोजन शाम करीब चार बजे और रात का खाना लगभग 11 बजे मिलता है। बिजली नहीं होने के कारण उन्हें अंधेरे में रहना पड़ रहा है। नेहा को हर 15 से 20 दिन में अपने पति से एक-दो मिनट बात करने का मौका मिलता है। इतने कम समय में वह उनकी स्थिति के बारे में पूरी जानकारी भी नहीं ले पातीं।
यह भी पढ़ें: MLC चुनाव को लेकर अखिलेश यादव का भाजपा पर तंज,बोले- अभी तो हार की शुरुआत
प्रधानमंत्री और विदेश मंत्रालय से लगाई गुहार
विनीत के परिवार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और विदेश मंत्री एस. जयशंकर से हस्तक्षेप की मांग की है। परिवार का कहना है कि कई अधिकारियों से संपर्क करने और पत्र सौंपने के बावजूद उन्हें अब तक केवल आश्वासन मिले हैं।
परिवार के मुताबिक, जहाज के कराची पहुंचने के बाद एक ईरानी कंपनी और बंदरगाह अधिकारियों के बीच विवाद हुआ था, जिसके बाद जहाज को जब्त कर लिया गया। परिवार का यह भी आरोप है कि जहाज की बिजली काट दी गई और नाविकों के पासपोर्ट जब्त कर लिए गए।
मामले को लेकर परिवार दिल्ली पहुंचा है और प्रधानमंत्री कार्यालय, राष्ट्रपति कार्यालय तथा विदेश मंत्रालय में आवेदन सौंपने का दावा किया है।
अब परिवार की सबसे बड़ी मांग यही है कि मामले में जल्द हस्तक्षेप किया जाए और सभी छह भारतीय नाविकों की सुरक्षित भारत वापसी सुनिश्चित की जाए। विनीत के परिवार को उम्मीद है कि उनकी अपील पर जल्द कार्रवाई होगी और उनके बच्चे अपने पिता को फिर से घर में देख सकेंगे।

