नई दिल्ली। सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक का आमरण अनशन अस्पताल में भर्ती होने के बाद भी जारी है। रविवार को उनका अनशन 22वें दिन में प्रवेश कर गया। दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में भर्ती वांगचुक ने डॉक्टरों की सलाह के बावजूद ड्रिप, ओआरएस और दवा लेने से इनकार कर दिया है। दूसरी ओर, उनके समर्थक सोमवार को प्रस्तावित संसद मार्च की तैयारी में जुटे हैं, जबकि दिल्ली पुलिस ने इसकी अनुमति नहीं होने की बात कही है।
शनिवार तड़के दिल्ली पुलिस ने वांगचुक को जंतर-मंतर से हटाकर सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया था। पुलिस सूत्रों के अनुसार, इस कार्रवाई के लिए देर रात विशेष रणनीति बनाई गई थी ताकि बिना किसी टकराव के उन्हें अस्पताल पहुंचाया जा सके।
देर रात बना प्लान, सुबह हुई कार्रवाई
सूत्रों के मुताबिक, शुक्रवार देर रात करीब 1:30 बजे वरिष्ठ अधिकारियों को कार्रवाई के निर्देश मिले। इसके बाद मंदिर मार्ग थाने में पूरी रणनीति तैयार की गई। पुलिसकर्मियों ने यह अभ्यास भी किया कि वांगचुक को बिना विवाद के एम्बुलेंस तक कैसे पहुंचाया जाए।
बताया गया कि सुबह करीब 5 बजे अधिकारी जंतर-मंतर पहुंचे। सादे कपड़ों में मौजूद पुलिसकर्मी सफेद चादरों के साथ मंच पर पहुंचे और वांगचुक को अस्पताल ले जाया गया।
जंतर-मंतर पर सुरक्षा बढ़ाई गई
सोमवार को प्रस्तावित संसद मार्च को देखते हुए जंतर-मंतर और आसपास के इलाके में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। पुलिस ने वहां 100 से अधिक जवानों के साथ रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) की भी तैनाती की है।
अस्पताल ने जारी किया हेल्थ अपडेट
सफदरजंग अस्पताल के अनुसार, वांगचुक के वाइटल पैरामीटर फिलहाल स्थिर हैं, लेकिन उनकी ब्लड रिपोर्ट में कुछ मानक सामान्य से अलग हैं। डॉक्टरों के मुताबिक, उन्हें डिहाइड्रेशन, पोटैशियम की कमी और अन्य मेटाबॉलिक समस्याओं के संकेत मिले हैं। चिकित्सक लगातार उन्हें इलाज और आवश्यक दवाएं लेने के लिए मना रहे हैं।
वहीं, वांगचुक की पत्नी गीतांजलि आंगमो ने परिवार की सहमति के बिना कोई उपचार नहीं किए जाने की मांग की है।
समर्थकों का दावा- संसद मार्च हर हाल में होगा
वांगचुक के समर्थन में प्रदर्शन कर रहे संगठन और समर्थकों का कहना है कि सोमवार को संसद तक मार्च निकाला जाएगा। उनका दावा है कि इसकी जानकारी पहले ही पुलिस को दे दी गई थी।
हालांकि, दिल्ली पुलिस का कहना है कि संसद मार्च के लिए आवश्यक अनुमति नहीं ली गई है। संसद के मानसून सत्र के दौरान संसद परिसर और आसपास के क्षेत्रों में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 163 लागू रहती है। ऐसे में बिना अनुमति मार्च निकालने पर कार्रवाई की जा सकती है।

