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अस्पताल से डिस्चार्ज होते ही राजघाट पहुंचे सोनम वांगचुक

नई दिल्ली: सामाजिक एवं पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक सोमवार को गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल से डिस्चार्ज होने के बाद सीधे दिल्ली के राजघाट पहुंचे। यहां उन्होंने अपनी पत्नी डॉ. गीतांजलि के साथ महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि अर्पित की।

अस्पताल से दोपहर करीब 1:45 बजे छुट्टी मिलने के बाद मीडिया से बातचीत में वांगचुक ने कहा कि, महात्मा गांधी का दिखाया अहिंसा और सत्याग्रह का मार्ग आज भी उतना ही प्रभावी है, जितना आज़ादी के आंदोलन के दौरान था। उन्होंने कहा कि उनके आंदोलन की सफलता का सबसे बड़ा कारण उसका पूरी तरह शांतिपूर्ण होना था।

गांधीजी का रास्ता आज भी लोगों के दिल तक पहुंचता है

सोनम वांगचुक ने कहा कि कई लोगों का मानना था कि मौजूदा दौर में गांधीजी के सिद्धांत काम नहीं करेंगे, लेकिन उनका अनुभव बिल्कुल अलग रहा। उनके मुताबिक, यह रास्ता सरकार से पहले जनता के दिल तक पहुंचता है। उन्होंने कहा कि लद्दाख में भी उन्होंने गांधीवादी तरीके से आंदोलन किया था और अब देशव्यापी स्तर पर भी इस पद्धति की प्रभावशीलता देखने को मिली है।

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अहिंसा सबसे कठोर दिल को भी बदल सकती है

वांगचुक ने देशवासियों से अपील करते हुए कहा कि समस्याओं के समाधान के लिए अहिंसा और संयम का रास्ता अपनाना चाहिए। उन्होंने कहा कि सफलता मिलने में समय लग सकता है, लेकिन लगातार शांतिपूर्ण प्रयास अंततः सकारात्मक परिणाम देते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि दूसरों को नुकसान पहुंचाने के बजाय स्वयं कठिनाइयों का सामना करना ही गांधीवादी आंदोलन की असली ताकत है।

हिंसा होती तो मामला और बिगड़ जाता

वांगचुक ने कहा कि वह देशभर के युवाओं और उन सभी लोगों का धन्यवाद करते हैं, जिन्होंने पूरे आंदोलन को शांतिपूर्ण बनाए रखा। उनके अनुसार, अगर आंदोलन हिंसक हो जाता तो स्थिति और गंभीर हो सकती थी। उन्होंने कहा कि समाधान ताकत, लाठी या पत्थर से नहीं, बल्कि धैर्य और शांति से निकला। इसी कारण उन्होंने आंदोलन को तय समय से पहले समाप्त करने का फैसला किया।

शिक्षा मंत्री के इस्तीफे पर जताई उम्मीद

पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर प्रतिक्रिया देते हुए वांगचुक ने कहा कि, उन्हें उम्मीद है कि शिक्षा व्यवस्था में आवश्यक सुधार किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ शुरुआत है और संसद में इस विषय पर चर्चा जारी है।

वांगचुक ने विश्वास जताया कि जनता से किए गए वादे पूरे होंगे और शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन करने वाले लोगों के साथ न्याय किया जाएगा। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में जनता के सवालों का जवाब देना सरकार और जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी है।

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