कोलकाता। पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर कथित असंतोष और सांसदों की नाराजगी को लेकर चर्चाएं जोर पकड़ रही हैं। राजनीतिक गलियारों में दावा किया जा रहा है कि पार्टी के करीब 20 लोकसभा सांसद एक अलग गुट के रूप में सक्रिय हैं और इनमें जाधवपुर से सांसद सयानी घोष का नाम भी शामिल बताया जा रहा है। हालांकि, पार्टी की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है, लेकिन इन अटकलों ने बंगाल की राजनीति का तापमान बढ़ा दिया है।
काकोली घोष के नेतृत्व की चर्चा
सूत्रों के मुताबिक, बारासात से सांसद काकोली घोष दस्तीदार के नेतृत्व में एक समूह पार्टी नेतृत्व से नाराज बताया जा रहा है। दावा किया जा रहा है कि यह गुट लोकसभा में अपनी अलग राजनीतिक रणनीति पर विचार कर रहा है। हालांकि कथित बागी सांसदों की पूरी सूची अभी सार्वजनिक नहीं हुई है।
कौन हैं सयानी घोष?
बता दें सयानी घोष तृणमूल कांग्रेस की युवा और मुखर नेताओं में गिनी जाती हैं। उन्होंने वर्ष 2021 में औपचारिक रूप से पार्टी का दामन थामा था और जल्द ही पार्टी नेतृत्व का भरोसा हासिल कर लिया। जाधवपुर लोकसभा सीट से सांसद बनने के बाद उनकी पहचान राष्ट्रीय स्तर पर मजबूत हुई। उन्हें पार्टी की युवा इकाई की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी भी सौंपी गई थी। राजनीतिक मंचों पर उनकी आक्रामक शैली और बेबाक बयानों के कारण उन्हें TMC की प्रमुख युवा आवाजों में माना जाता है।
हाल के दिनों में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के रुख ने भी राजनीतिक चर्चाओं को हवा दी है। राज्यसभा सांसद सुखेंदु शेखर राय के इस्तीफे के बाद यह चर्चा और तेज हो गई कि पार्टी के भीतर कुछ नेता नेतृत्व से असहमत हैं।
बंगाल की राजनीति पर क्या होगा असर?
वहीं लोकसभा में TMC के सांसदों की संख्या पार्टी की राष्ट्रीय राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। ऐसे में किसी भी प्रकार की अंदरूनी टूट-फूट या असंतोष की खबरें न केवल पार्टी बल्कि विपक्षी राजनीति के समीकरणों को भी प्रभावित कर सकती हैं। फिलहाल सभी की नजरें तृणमूल कांग्रेस नेतृत्व और उन सांसदों पर टिकी हैं, जिनके नाम कथित बागी गुट से जोड़े जा रहे हैं।

