मुंबई: अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में लगी आग और अमेरिकी फेडरल रिजर्व की अहम बैठक से ठीक पहले भारतीय शेयर बाजार में सोमवार 26अक्टूबर को सुबह से ही घबराहट और सतर्कता का मिला-जुला माहौल देखने को मिला।
पिछले पूरे हफ्ते बाजार लगातार चारों दिन गिरावट में बंद हुआ था, जहाँ निफ्टी में 2.4% और सेंसेक्स में 2.2% की बड़ी गिरावट आई थी। इसी कमजोर sentiment के साथ आज दलाल स्ट्रीट की शुरुआत भी लाल निशान में हुई। शुरुआती कारोबार में निवेशकों ने मुनाफा वसूली की और बिकवाली का दबाव साफ दिखा।
लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं हुई। सुबह 10 बजे के बाद बाजार ने निचले स्तरों से जोरदार वापसी की। फार्मा और मेटल कंपनियों में हुई ताबड़तोड़ खरीदारी ने बाजार को सहारा दिया और प्रमुख सूचकांक दिन के निचले स्तर से 400 अंक तक सुधर गए। इसी उतार-चढ़ाव के बीच निवेशकों की नजरें लगातार वैश्विक बाजारों, ब्रेंट क्रूड की चाल और रुपये की स्थिति पर टिकी रहीं।
सुबह 300 अंक टूटा सेंसेक्स
आज बाजार की ओपनिंग कमजोर रही। BSE सेंसेक्स करीब 133 अंक की गिरावट के साथ 72,990 पर खुला, जबकि NSE निफ्टी 75 अंक टूटकर 22,524 के स्तर पर खुला। GIFT Nifty भी सुबह 22,608 के आसपास कारोबार करता दिखा, जो बाजार में फ्लैट से निगेटिव शुरुआत के संकेत दे रहा था।
पिछले हफ्ते भी बाजार पर दबाव बना रहा था। पूरे हफ्ते में निफ्टी में करीब 2.4% और सेंसेक्स में 2.2% की गिरावट दर्ज की गई थी, जिसकी बड़ी वजह ब्रेंट क्रूड का 115 डॉलर के पार निकल जाना है।
सुबह 10:26 बजे तक सेंसेक्स 221 अंक फिसलकर 72,902 पर आ गया था, वहीं निफ्टी हल्की बढ़त के साथ 22,628 पर ट्रेड कर रहा था।
दोपहर में रिकवरी
शुरुआती बिकवाली के बाद बाजार में चुनिंदा सेक्टर्स में खरीदारी लौटी। फार्मा, मेटल और हेल्थकेयर शेयरों में तेज डिमांड दिखी, जिससे सूचकांकों को सहारा मिला। दोपहर 1:35 बजे तक सेंसेक्स 180 अंक की बढ़त के साथ 73,305 के स्तर पर पहुंच गया, वहीं निफ्टी करीब 50 अंक चढ़कर 22,649 पर कारोबार करने लगा।
आज के कारोबार में Dr. Reddy’s, Kotak Mahindra Bank, JSW Steel और Adani Ports टॉप गेनर्स में रहे, जबकि Asian Paints, Bajaj Finance और HDFC Life टॉप लूजर्स की लिस्ट में रहे।
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क्यों है सतर्कता?
1. कच्चा तेल: ब्रेंट क्रूड $114.2 प्रति बैरल के आसपास है, जो 6 महीने के हाई $117 के करीब है। भारत तेल आयात पर निर्भर है, इसलिए महंगा तेल महंगाई बढ़ा सकता है।
2. FED मीटिंग: 27-28 अक्टूबर को अमेरिकी फेडरल रिजर्व की बैठक है। ब्याज दरें स्थिर रहने की उम्मीद है, लेकिन अगर सख्त रुख दिखा तो डॉलर मजबूत होगा और भारत से विदेशी पैसा निकल सकता है।
3. FII-DII: शुक्रवार को विदेशी निवेशकों ने 890 करोड़ की खरीदारी की थी।
एक्सपर्ट्स का कहना है कि जब तक कच्चे तेल और भू-राजनीतिक तनाव पर स्पष्टता नहीं आती, बाजार में अस्थिरता बनी रहेगी। निवेशकों को सलाह है कि जल्दबाजी में फैसला न लें और बाजार बंद होने तक इंतजार करें।

