नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने NCERT की किताबों में भारतीय न्यायपालिका से जुड़े अध्याय को लेकर स्वत: संज्ञान मामले में महत्वपूर्ण सुनवाई की। सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कक्षा 8 की एनसीईआरटी पुस्तक में शामिल सामग्री पर गंभीर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि इतनी कम उम्र के बच्चों के लिए तैयार की गई किताबों में न्यायपालिका से जुड़े विवादित संदर्भ और कार्टून शामिल करना उचित नहीं माना जा सकता।
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत में कहा, ‘हम ऐसे किसी सदस्य से खुद को जोड़ना नहीं चाहेंगे, जिसने यह अध्याय तैयार किया। मुझे कक्षा 11 की किताब में भी ऐसा ही एक और उदाहरण मिला, जहां कार्टून दिए गए हैं। कम उम्र के बच्चों पर इसके प्रभाव को देखते हुए इस तरह की सामग्री की जरूरत नहीं है।’ उनके बयान के बाद अदालत में इस विषय पर गंभीर चर्चा हुई।
वहीं मामले की सुनवाई के दौरान भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने कहा कि इस मुद्दे की समीक्षा न्यायमूर्ति इंदु मल्होत्रा की अध्यक्षता वाली समिति द्वारा की जानी चाहिए। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि समिति इस मामले पर विचार कर सकती है या आवश्यकता पड़ने पर किसी अन्य विशेषज्ञ से भी राय ले सकती है।
सुप्रीम कोर्ट की इस टिप्पणी के बाद शिक्षा व्यवस्था, पाठ्यक्रम सामग्री और बच्चों पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। अब सभी की नजरें समिति की रिपोर्ट और आगे की कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।

