नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने हेट स्पीच से जुड़ी कई याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए साफ कर दिया कि नए गाइडलाइंस या कानून की फिलहाल जरूरत नहीं है। कोर्ट के अनुसार, भारत में पहले से मौजूद कानून इस तरह के मामलों से निपटने के लिए पर्याप्त हैं, असल कमी उनके सही और सख्त क्रियान्वयन में है।
पुलिस और सिस्टम की जिम्मेदारी
सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि हेट स्पीच के मामलों में तुरंत FIR दर्ज करना अनिवार्य। अगर पुलिस कार्रवाई नहीं करती, तो पीड़ित सीधे कोर्ट जा सकता है। लापरवाही पर अधिकारियों की जवाबदेही तय होगी।
याचिकाओं में क्या कहा गया?
वहीं मामले पर याचिकाकर्ताओं ने देश के अलग-अलग राज्यों की घटनाओं का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि धार्मिक सभाओं में दिए गए भड़काऊ भाषणों पर समय पर कार्रवाई नहीं होती है।2022 में कोर्ट द्वारा दिए गए निर्देशों का जमीनी स्तर पर पालन कमजोर है।

