भोपाल: स्वदेशी केवल बाजार में बिकने वाली वस्तु नहीं, बल्कि देश के प्रति सम्मान और आत्मनिर्भरता का भाव है। इस भावना को मजबूत करने के लिए पहले स्वयं को स्वदेशी बनना होगा, तभी दूसरों को प्रेरित किया जा सकता है। यह बात भाजपा विधायक अमरीश शर्मा ने कही।
वे मंगलवार को स्वदेशी जागरण मंच एवं स्वर्णिम भारतवर्ष फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में शासकीय मोतीलाल विज्ञान महाविद्यालय परिसर में आयोजित स्वदेशी मेले के चौथे दिन आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। 24 अक्टूबर से 4 नवंबर तक चलने वाले इस मेले में देश में बने उत्पादों को बढ़ावा देने के साथ ही भारतीय संस्कृति और परंपराओं को मंच दिया जा रहा है।
अमरीश शर्मा ने कहा कि बंगाल विभाजन के समय शुरू हुआ स्वदेशी आंदोलन देश की स्वतंत्रता की लड़ाई का एक महत्वपूर्ण पहलू था। विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार सरकार सीधे तौर पर नहीं कर सकती, इसलिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लोगों से स्वदेशी अपनाने का आह्वान कर रहे हैं। चीन जैसे देश समय-समय पर भारत को आर्थिक नुकसान पहुंचाने का प्रयास करते हैं। भारत को फिर से विश्वगुरु बनाने के लिए जरूरी है कि हम स्वयं स्वदेशी वस्तुओं का इस्तेमाल करें।
स्वदेशी केवल वस्तु नहीं, देश के प्रति भावना
योग आयोग के अध्यक्ष राघवेंद्र शर्मा ने कहा कि स्वदेशी एक भावना, विचार और संकल्प है। अपने देश के लिए कुछ कर गुजरने का भाव ही स्वदेशी है। अंग्रेजों ने जब बंगाल का विभाजन किया था, तब उसके विरोध में बड़ी संख्या में देशवासी खड़े हुए थे। यह भी स्वदेशी भावना का ही उदाहरण था।
उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम ने सोने की लंका में रहने के बजाय अपनी मातृभूमि लौटना उचित समझा। यह अपने देश के प्रति प्रेम का उदाहरण है। सामान खरीदते समय भी विचार करें कि वह स्वदेशी है या नहीं। देश के प्रति सच्चा प्रेम अपने व्यवहार में भी दिखाई देना चाहिए।
छोटे प्रयासों से बड़ी सफलता मिलेगी
सेज ग्रुप के चेयरपर्सन संजीव अग्रवाल ने कहा कि स्वदेशी शब्द में ही ऊर्जा का भाव है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वदेशी की भावना को फिर से सामने लाने का प्रयास किया है। देश को आगे ले जाने के लिए निरंतर प्रयास करना जरूरी है। शुरुआत छोटी हो सकती है, लेकिन उसका परिणाम बड़ा हो सकता है।
मेला संयोजक सतीश विश्वकर्मा ने कहा कि इस मेले के माध्यम से उन स्वदेशी कंपनियों को अपने उत्पादों के प्रदर्शन और बिक्री का अवसर मिलता है, जिन्हें बड़े मंचों पर जगह नहीं मिल पाती। स्वदेशी वस्तुओं की खरीद से देश का पैसा देश में ही रहता है।
मीडिया प्रभारी महेंद्र चौहान के मुताबिक, मेले में कारीगरों, बुनकरों, शिल्पकारों और एमएसएमई को अपने उत्पादों के प्रदर्शन और बिक्री का अवसर मिलेगा। युवाओं, महिलाओं और नए उद्यमियों को भी स्वरोजगार के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।
12 दिन चलने वाले मेले में प्रतिदिन सांस्कृतिक प्रस्तुतियां, स्कूली बच्चों के कार्यक्रम और युवाओं के लिए नाटक-नृत्य प्रतियोगिताएं आयोजित हो रही हैं।
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लोककलाओं और भक्ति संगीत की प्रस्तुतियां हुई
मेले के चौथे दिन महापुरुषों पर नारा लेखन प्रतियोगिता आयोजित की गई। शाम को सांस्कृतिक कार्यक्रमों की शुरुआत सरस्वती वंदना से हुई। इसके बाद गणेश वंदना, महिला मंडल की ओर से भक्ति संगीत, कथक नृत्य और माता की स्तुति की प्रस्तुतियां दी गईं।
YGB की पहल के तहत युवाओं को भक्ति से जोड़ने के लिए भक्ति संगीत कार्यक्रम आयोजित किया गया। गायक समीर नेगी, प्रभुत मिश्रा और सोनम ने ‘सांसों की माला पर’, ‘सियाराम-सियाराम’ सहित भक्ति गीतों की प्रस्तुतियां दीं।
कार्यक्रम में स्वदेशी जागरण मंच के मध्य क्षेत्र संयोजक सुधीर दाते, श्रीकांत बुदौलिया, सीमा भारद्वाज, दीपक वर्मा, रमन तिवारी, विनय कुमार सोनी, दत्तो पंत ठेंगरी शोध संस्था के निदेशक मुकेश मिश्रा सहित अन्य पदाधिकारी उपस्थित रहे।

