लखनऊ: उत्तर प्रदेश में जनगणना 2027 तय कार्यक्रम के मुताबिक ही होगी। जनगणना टाले जाने की खबरों को अधिकारियों ने निराधार बताया है। जनगणना अधिकारियों के मुताबिक, उत्तर प्रदेश में 1 दिसंबर 2026 से 4 जनवरी 2027 तक घर-घर जाकर जनगणना की जाएगी। इससे पहले 16 नवंबर से 30 नवंबर तक लोगों को स्व-गणना यानी ऑनलाइन अपनी जानकारी दर्ज कराने का मौका मिलेगा। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि जनगणना की प्रक्रिया में फिलहाल कोई बदलाव नहीं किया गया है और पूरी कार्रवाई तय समय-सारणी के अनुसार होगी।
चार राज्यों के कार्यक्रम में कोई बदलाव नहीं
केंद्र सरकार ने 5 सितंबर 2026 को जारी अधिसूचना में उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, गोवा और पंजाब के लिए जनगणना का कार्यक्रम तय किया था। अधिकारियों के मुताबिक, इन राज्यों के कार्यक्रम में कोई बदलाव नहीं किया गया है। इसलिए उत्तर प्रदेश में जनगणना तय तारीखों पर ही होगी।
जनगणना की अधिसूचना से बढ़ा भ्रम
30 अक्टूबर को जारी एक अन्य अधिसूचना में कुछ राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए जनगणना की अवधि 25 जनवरी से 28 फरवरी 2027 तय की गई है। इसके बाद उत्तर प्रदेश में भी जनगणना टलने की चर्चा शुरू हो गई थी। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि यह तारीखें यूपी, उत्तराखंड, गोवा और पंजाब पर लागू नहीं हैं। इन राज्यों को इस अधिसूचना से अलग रखा गया है।
जाति से जुड़ी जानकारी होगी दर्ज
जनगणना 2027 में जाति से जुड़ी जानकारी भी दर्ज की जाएगी। देश में इससे पहले 1931 में जाति आधारित जनगणना हुई थी। इस तरह करीब 95 साल बाद जातियों से संबंधित आंकड़े जुटाए जाएंगे। इस बार लोगों से करीब 40 सवाल पूछे जाने हैं।
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अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील
जनगणना की पूरी प्रक्रिया डिजिटल तरीके से की जाएगी। लोगों को स्व-गणना के जरिए ऑनलाइन जानकारी देने का विकल्प मिलेगा। इसके बाद जनगणना कर्मी घर-घर जाकर आंकड़े जुटाएंगे। जनगणना का पहला चरण मकानों और घरों की गिनती से जुड़ा था, जो जून 2026 में पूरा हो चुका है। अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और तय कार्यक्रम के अनुसार प्रक्रिया में सहयोग करें।

