भोपाल। प्रधानमंत्री आवास योजना में केंद्र सरकार ने बड़ा बदलाव करते हुए आदिवासी और ग्रामीण परिवारों को राहत दी है। अब योजना के तहत घर बनाने के लिए आरसीसी लेंटर वाली छत अनिवार्य नहीं रहेगी। सरकार ने पारंपरिक निर्माण शैली को मान्यता देते हुए खपरैल, टीन शेड और स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप सुरक्षित पक्की छत वाले मकानों को भी योजना में शामिल करने का निर्णय लिया है।
प्रदेश के पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद पटेल ने एक कार्यक्रम में इसकी जानकारी देते हुए बताया कि यह फैसला ग्रामीण और जनजातीय क्षेत्रों की वास्तविक जरूरतों को ध्यान में रखकर लिया गया है। कई गरीब परिवार आर्थिक रूप से महंगे कंक्रीट लेंटर बनवाने में सक्षम नहीं होते, जबकि वे वर्षों से पारंपरिक और मौसम के अनुकूल घरों में रहकर अपनी जीवनशैली बनाए हुए हैं। मंत्री ने बताया कि आदिवासी समुदायों ने सरकार को अपनी पारंपरिक आवास शैली और स्थानीय समस्याओं से अवगत कराया था। इसके बाद केंद्र सरकार ने योजना के नियमों में संशोधन कर स्थानीय संस्कृति और आर्थिक स्थिति के अनुरूप निर्माण की अनुमति दी है।
सरकार के इस फैसले से अब दूरदराज और जनजातीय इलाकों में रहने वाले परिवार अपनी पारंपरिक वास्तुकला के अनुसार मकान बना सकेंगे। खास बात यह है कि योजना का लाभ लेते हुए भी वे अपनी सांस्कृतिक पहचान और स्थानीय निर्माण पद्धति को बरकरार रख पाएंगे। हालांकि यह छूट केवल ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों के लिए लागू होगी, शहरी क्षेत्रों में पहले की व्यवस्था ही प्रभावी रहेगी।
हितग्राही के खाते में आयेगी राशि
योजना के तहत मिलने वाली आर्थिक सहायता पहले की तरह सीधे हितग्राहियों के बैंक खातों में भेजी जाएगी। इससे परिवार अपनी जरूरत, स्थानीय सामग्री और बजट के अनुसार घर का निर्माण कर सकेंगे। सरकार को उम्मीद है कि इस बदलाव से आवास योजना का दायरा बढ़ेगा और अधिक जरूरतमंद परिवार योजना से जुड़ सकेंगे।

