चेन्नई: उम्र सिर्फ 15 साल, लेकिन मैदान पर फैसले ऐसे कि टीम के कप्तान भी उनकी बात सुन रहे हैं। दलीप ट्रॉफी में ईस्ट जोन के युवा खिलाड़ी वैभव सूर्यवंशी ने कुछ ऐसा ही करके दिखाया। साउथ जोन के खिलाफ फाइनल में एक विकेट के लिए वैभव ने कप्तान ईशान किशन को DRS लेने की सलाह दी और उनका अंदाजा बिल्कुल सही निकला।
दलीप ट्रॉफी में वैभव सूर्यवंशी ने अपनी बल्लेबाजी के साथ मैदान पर फैसले लेने की क्षमता से भी सभी का ध्यान खींचा। DRS से जुड़े उनके फैसलों के बाद अब उनकी Leadership Skills की चर्चा हो रही है।
ईशान सोचते रहे, वैभव ने कहा- रिव्यू लो
साउथ जोन की पारी के दौरान मुकेश कुमार की गेंद रिकी भुई के बल्ले के बेहद करीब से निकलकर विकेटकीपर के पास पहुंची। ईस्ट जोन के खिलाड़ियों ने कैच की अपील की, लेकिन मैदान पर बल्लेबाज को Not Out दिया गया। ईशान किशन रिव्यू लेने को लेकर पूरी तरह आश्वस्त नहीं दिखे। इसी बीच वैभव ने उन्हें DRS लेने के लिए कहा। आखिरकार ईशान ने अपने युवा साथी की बात मानी और फैसला Third Umpire के पास पहुंच गया।
इसके बाद UltraEdge में बल्ले का किनारा साफ हुआ और मैदानी अंपायर का फैसला बदलना पड़ा। रिकी भुई सिर्फ एक रन बनाकर वापस लौटे। यानी विकेट भले ही मुकेश कुमार के खाते में गया, लेकिन उसे हासिल करने में वैभव की भूमिका भी अहम रही।
कमेंटेटर्स भी हुए वैभव की समझ के फैन
इस घटना के बाद कमेंट्री बॉक्स में भी वैभव की खूब चर्चा हुई। उनकी Game Awareness और रिव्यू को लेकर आत्मविश्वास की तारीफ की गई। कम उम्र में दबाव के बीच इस तरह फैसला लेना उनके लिए खास माना जा रहा है।
वैभव इससे पहले भी DRS को लेकर अपनी समझ दिखा चुके हैं। सेमीफाइनल में Stand-in Captain की जिम्मेदारी मिलने पर आर्यन जुयाल के खिलाफ लिया गया उनका रिव्यू सही साबित हुआ था।
बल्ले से आगे बढ़ी वैभव की पहचान
वैभव को अब तक उनकी आक्रामक बल्लेबाजी के लिए ज्यादा पहचाना जाता रहा है, लेकिन दलीप ट्रॉफी ने उनका दूसरा अंदाज भी सामने रखा है। फील्ड पर नजर, सही समय पर फैसला और कप्तान को अपनी बात पर भरोसा दिलाना उनके खेल की नई खूबी बनकर सामने आई है।
ईस्ट जोन ने इस बार दलीप ट्रॉफी का खिताब भी अपने नाम किया और 14 साल बाद टूर्नामेंट में चैंपियन बना। ईशान किशन की कप्तानी वाली टीम में वैभव की भूमिका ने यह जरूर दिखाया कि इस युवा खिलाड़ी की कहानी केवल बड़े शॉट लगाने तक सीमित नहीं रहने वाली है।

