बालाघाट: जिले की एक आदिवासी महिला ने अपनी पुश्तैनी भूमि का नाम राजस्व अभिलेखों से हटाकर कथित रूप से फर्जी तरीके से विक्रय किए जाने का गंभीर आरोप लगाते हुए कलेक्टर बालाघाट को ज्ञापन सौंपकर पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच और दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
खामटोला (चांगोटोला) निवासी सगुनाबाई ने कलेक्टर को दिए आवेदन में बताया कि, वह गोंड समाज की महिला हैं तथा मूल रूप से ग्राम डोंगरिया की निवासी हैं। उनका विवाह लगभग 20 से 22 वर्ष पूर्व खामटोला में हुआ, जिसके बाद से वह वहीं निवास कर रही हैं। उन्होंने बताया कि उनकी नानी कमलीबाई तथा माता बेंदुबाई के नाम ग्राम डोंगरिया में पैतृक भूमि दर्ज थी। माता की मृत्यु के बाद उत्तराधिकार के आधार पर उनका नाम दर्ज होना चाहिए था, लेकिन ऐसा नहीं किया गया।
आवेदिका के अनुसार राष्ट्रीय राजमार्ग एनएच-543 के निर्माण के लिए वर्ष 2023 में भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया के दौरान जारी राजपत्र में उनके परिवार के नाम दर्ज थे, किंतु नामों में त्रुटियां होने के बावजूद उनका सुधार नहीं किया गया। उनका आरोप है कि इसी का लाभ उठाते हुए राजस्व अभिलेखों से उनकी माता का नाम हटाकर केवल अन्य सहखातेदारों के नाम दर्ज कर दिए गए और जानबूझकर उनका नाम उत्तराधिकारी के रूप में नहीं जोड़ा गया।
ज्ञापन में आरोप लगाया गया है, कि सहखातेदार लक्ष्मण की मृत्यु के बाद उसकी पुत्रियां मनौती और सनौती के नाम राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज कर दिए गए, जबकि बेंदुबाई की एकमात्र उत्तराधिकारी होने के बावजूद सगुनाबाई का नाम शामिल नहीं किया गया। इसके बाद कथित रूप से 13 फरवरी 2024 को संबंधित भूमि का विक्रय पत्र निष्पादित कराया गया। आवेदिका का कहना है कि विक्रय पत्र में बैंकिंग माध्यम से भुगतान दर्शाया गया, जबकि वास्तविक रूप से विक्रेताओं को कोई प्रतिफल राशि नहीं दी गई।
सगुनाबाई ने आरोप लगाया कि बाद में उक्त भूमि को दूसरे व्यक्ति के नाम विक्रय कर दिया गया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि भूमि हस्तांतरण की अनुमति मिलने से पहले ही पटवारी द्वारा भूमि का नक्शा काट दिया गया, जिससे पूरे मामले में राजस्व अधिकारियों की भूमिका भी संदेह के घेरे में आ गई है।
आवेदन में यह भी उल्लेख किया गया है कि दोनों विक्रय पत्रों में संलग्न नक्शों में गंभीर अंतर है। एक नक्शा वर्ष 1996-97 का तथा दूसरा वर्ष 2012-13 का बताया गया है, जिनमें एक ही भूमि को अलग-अलग स्वरूप में दर्शाया गया है। आवेदिका का आरोप है कि यह पूरा कृत्य सुनियोजित षड्यंत्र और छल-कपट के तहत किया गया।
महिला ने यह भी आरोप लगाया कि मनौती और सनौती को यह कहकर रजिस्ट्रार कार्यालय ले जाया गया कि राष्ट्रीय राजमार्ग के मुआवजे की प्रक्रिया पूरी करनी है, जबकि उनसे धोखे से विक्रय पत्र पर हस्ताक्षर करा लिए गए। मामले की शिकायत पूर्व में पुलिस से भी की गई थी, लेकिन कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई।
ज्ञापन में तत्कालीन एवं वर्तमान पटवारियों की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं। आवेदिका का आरोप है कि राजस्व रिकॉर्ड में हेरफेर कर उनकी माता का नाम हटाया गया तथा उत्तराधिकारी होने के बावजूद उनका नाम दर्ज नहीं किया गया, जिससे उन्हें उनकी पैतृक संपत्ति से वंचित कर दिया गया।
सगुनाबाई ने कलेक्टर से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर भूमि हस्तांतरण, नामांतरण, विक्रय पत्रों तथा राजस्व अभिलेखों की जांच कराने, दोषी अधिकारियों एवं संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध वैधानिक एवं दंडात्मक कार्रवाई करने तथा उन्हें उनकी वैधानिक भूमि का अधिकार दिलाने की मांग की है।

