जबलपुर:देश को आजाद हुए 75 साल से ज्यादा हो गए और आजादी का अमृत महोत्सव मनाया जा रहा है। ऐसे में जब मध्य प्रदेश के गांवों से ऐसी तस्वीरें सामने आती हैं कि सड़क मार्ग से अछूते गांवों में एंबुलेंस नहीं पहुंचने से किसी प्रेग्नेंट महिला की मौत हो गई है तो इससे ज्यादा शर्मनाक कुछ और नहीं हो सकता। हालांकि इस प्रकार के मामले बिल्कुल आम हैं। मध्य प्रदेश में आज भी हजारों ऐसे गांव हैं, जो साल के बारह महीने देश-दुनिया से कटे रहते हैं। बारिश के मौसम के हालात तो भयावह होते हैं। आइए जबलपुर से सटे कुछ गावों की सैर कराते हैं. कैसे यहां के ग्रामीणों का जीवन कीचड़युक्त हो चुका है
आजादी के 78 साल के बाद भी गांव में नहीं है पक्की सड़क
जबलपुर की 3 ऐसी बस्तियां, जहां बंजारा कोल और गोंड आदिवासी रहते हैं, ये सभी जातियां सरकार के लिए प्राथमिकता की सूची में हैं।इसके बावजूद इन बस्तियों तक अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ तो छोड़िए इन गांवों में अब तक पक्की सड़क नहीं पहुंच सकी है। जबलपुर के दुर्गा नगर का बंजार टोला और गुर्दा बस्ती के लोगों की कहानी रुलाने वाली है। यहां महिलाओं का प्रसव कीचड़ में ही हो गया।
दो किमी रास्ते में कीचड़ ही कीचड़, बीच में नाला
शाहपुरा ब्लॉक के चिरापौड़ी गांव के पास स्थित है दुर्गा नगर बस्ती। इसे बरगी बांध के विस्थापितों के लिए बसाया गया था। जब बरगी की बांध बना था, तब यहां पहले से कुछ गांव थे, जिन्हें पहाड़ी पर दूसरी जगह बसाया गया। दुर्गा नगर बस्ती तक पहुंचाने के लिए 2 किलोमीटर का कच्चा रास्ता है। बरसात में इस रास्ते में 20 मीटर का रास्ता भी तय नहीं किया जा सकता। पूरे रास्ते में कीचड़ है और बीच में एक नाला। यह स्थान जबलपुर से लगभग 40 किलोमीटर दूर पहाड़ में है इसलिए यहां तक प्रशासन भी नहीं पहुंचता।
उम्मीदें खत्म, ग्रामीण खुद बना रहे सड़क
दुर्गानगर गांव के रहने वाले सोनू का कहना है “अब तो हम लोगों ने तय कर लिया है कि सरकार हमारी सड़क बनाने नहीं आएगी। इसलिए गांव के लोग ही फावड़ा-तसला लेकर निकल गए। गांव के लोगों ने अपनी सड़क के गड्ढे भरे और खुद ही आसपास की बजरी उठाकर सड़क पर डाली ताकि कम से कम आपात स्थितियों में तो सड़क का इस्तेमाल किया जा सके।
इस इलाके से जिला पंचायत के सदस्य रामकुमार सैयामका कहना है “गांव में कई ऐसी महिलाएं मिल जाएंगी, जिनका प्रसव इसी कच्ची सड़क पर इसलिए हो गया, क्योंकि अस्पताल तक पहुंचने में समय ज्यादा लग गया। गांव में बरसात के 4 महीने गांव तक एंबुलेंस नहीं पहुंचती बीमार लोगों को कंधों पर ले जाना पड़ता है। वह कई बार इस मुद्दे को जिला पंचायत की बैठक में उठा चुके हैं. लेकिन दुर्गा नगर के लिए सड़क नहीं बनी।
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जिला पंचायत सीईओ का आश्वासन, जल्द बनेंगी सड़कें
जबलपुर शहर में कई ऐसी सड़कें हैं जो हर साल बनाई जाती हैं। शहर में वीआईपी आते हैं तो बनी बनाई सड़कों को दोबारा बनाया जाता है लेकिन आदिवासी लोगों के हिस्से में एक सड़क तक नहीं आ पाती। जबलपुर जिला पंचायत के सीईओ अभिषेक गहलोत का कहना है “जल्द ही इन सभी ग्रामीण सड़कों के लिए योजना बनाकर शासन को भेजी जाएगी। इनके निर्माण कार्य की स्वीकृतियां ली जाएंगी। बीते दिनों कुछ सड़कें मनरेगा योजना के तहत बनी थी लेकिन योजना बंद होने के वजह से नई योजना में इन्हें शामिल करने की प्रक्रिया की जा रही है।

