वॉशिंगटन: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने अनमैन्ड ड्रोन और उनके कंपोनेंट्स के आयात पर 100% तक टैरिफ लगाने का ऐलान किया है। अमेरिकी प्रशासन ने इस फैसले के पीछे राष्ट्रीय सुरक्षा और ड्रोन सेक्टर में विदेशी, खासकर चीनी कंपनियों पर निर्भरता कम करने को प्रमुख वजह बताया है।
व्हाइट हाउस के मुताबिक, नए टैरिफ से अमेरिका में ड्रोन और उनके पुर्जों का घरेलू उत्पादन बढ़ाने और विदेशी सप्लाई चेन पर निर्भरता घटाने में मदद मिलेगी। पिछले साल तक अमेरिकी कॉमर्शियल ड्रोन बाजार में चीनी कंपनियों की हिस्सेदारी करीब 70% बताई गई थी।
वजन और क्षमता के आधार पर टैरिफ
अमेरिकी प्रशासन ने अलग-अलग श्रेणी के ड्रोन के लिए अलग टैरिफ तय किया है।
- 100% टैरिफ: 25 किलोग्राम से ज्यादा वजन वाले या थर्मल इमेजिंग क्षमता वाले ड्रोन पर लागू होगा।
- 25% टैरिफ: 25 किलोग्राम या उससे कम टेक-ऑफ वजन वाले ड्रोन पर लगाया जाएगा।
- 21 दिन और 180 दिन में अलग-अलग नियम लागू
नए टैरिफ का बड़ा हिस्सा आदेश पर हस्ताक्षर होने के 21 दिन के भीतर लागू हो जाएगा। वहीं, कम संवेदनशील श्रेणी में आने वाले कुछ ड्रोन कंपोनेंट्स पर शुल्क 180 दिन बाद लागू होगा।
कुछ ऐसे उत्पाद और कंपोनेंट्स जिन्हें अमेरिकी युद्ध विभाग FCC की कवर्ड लिस्ट से छूट दिलाता है, उन पर भी निर्धारित शर्तों के तहत 180 दिन बाद टैरिफ प्रभावी होगा।
यूरोप और अन्य सहयोगी देशों पर भी शुल्क
अमेरिका ने केवल चीन जैसे प्रतिद्वंद्वी देशों को निशाना नहीं बनाया है, बल्कि कुछ सहयोगी देशों से आने वाले ड्रोन और पुर्जों पर भी शुल्क लगाया है।
15% टैरिफ: यूरोपीय संघ, जापान, लिकटेंस्टीन, दक्षिण कोरिया, स्विट्जरलैंड और ताइवान से आने वाले ड्रोन और कंपोनेंट्स पर।
10% टैरिफ: ब्रिटेन से आने वाले ड्रोन पर, बशर्ते उनके अधिकांश हार्डवेयर, सॉफ्टवेयर और तकनीक की उत्पत्ति अमेरिका या ब्रिटेन में हुई हो।
चीनी ड्रोन कंपनियों पर बढ़ेगा दबाव
यह फैसला चीनी ड्रोन तकनीक पर ट्रम्प प्रशासन की सख्ती के बीच आया है। वैश्विक ड्रोन बाजार में चीन की प्रमुख कंपनी DJI Technologies का बड़ा दबदबा है। अमेरिकी कॉमर्शियल ड्रोन बाजार में भी उसकी हिस्सेदारी काफी ज्यादा रही है।
अमेरिका पहले ही चीनी ड्रोन और संबंधित तकनीक पर कई तरह के प्रतिबंध लगा चुका है। दूसरी ओर, चीन ने भी अमेरिकी व्यापारिक प्रतिबंधों के जवाब में ड्रोन निर्यात पर रोक लगाने और कुछ अमेरिकी कंपनियों को ब्लैकलिस्ट करने जैसे कदम उठाए हैं।

