भोपाल। पुलिस ने एक ऐसे गिरोह का पर्दाफाश किया है जो समाजसेवा के मुखौटे के पीछे साइबर अपराध का काला कारोबार चला रहा था। आरोपियों ने दान का झांसा देकर एक ट्रस्ट अध्यक्ष को बंधक बनाया और उनके खाते का उपयोग गैर-कानूनी कामों के लिए करने की कोशिश की।
जालसाजों का ’दान’ वाला दांव
राजधानी भोपाल में ईंटखेड़ी थाना पुलिस ने एक बड़े साइबर गिरोह की साजिश को बेनकाब किया है। यह गिरोह अब तक की पारंपरिक ठगी से अलग तरीका अपना रहा था। आरोपियों ने उत्तर प्रदेश के एक समाजसेवी न्यास के अध्यक्ष को बड़ी रकम दान देने के बहाने भोपाल बुलाया। अध्यक्ष जब भोपाल पहुंचे, तो उन्हें सम्मान देने के बजाय बंधक बना लिया गया। अपराधियों का मकसद दान देना नहीं, बल्कि न्यास के बैंक खाते का विवरण हासिल करना था, ताकि उसका उपयोग काले धन को सफेद करने या ठगी की रकम इधर-उधर करने के लिए किया जा सके।
पाँच दिन का खौफ और यातना
पीड़ित के साथ आरोपियों ने अमानवीय व्यवहार किया। खाते की जानकारी देने से मना करने पर उनके साथ मारपीट की गई। पुलिस जांच में सामने आया है कि आरोपियों ने पीड़ित को करीब पांच दिनों तक शहर के अलग-अलग होटलों में छिपाकर रखा, ताकि किसी को शक न हो। वे लगातार उन पर दबाव बनाते रहे कि वे अपने संगठन के खाते का पूरा नियंत्रण उन्हें सौंप दें। यह गिरोह सीधे तौर पर लोगों को ठगने के बजाय, प्रतिष्ठित संस्थाओं के खातों को अपने अपराध का माध्यम बनाना चाहता था।
31 मुकदमों वाला मास्टरमाइंड
पुलिस की तत्परता से पांच आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है। जांच में चौंकाने वाला खुलासा यह हुआ है कि इस गिरोह का सरगना कोई मामूली अपराधी नहीं है, बल्कि उसके खिलाफ देश के विभिन्न राज्यों में साइबर धोखाधड़ी के 31 मामले पहले से दर्ज हैं। यह गिरफ्तारी न केवल भोपाल पुलिस के लिए बड़ी कामयाबी है, बल्कि इससे देशव्यापी ठगी के एक बड़े नेटवर्क के टूटने की भी संभावना है। पुलिस अब इनके अन्य संपर्कों को खंगाल रही है।


