कीव: रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच यूक्रेनी सैनिकों ने रूसी ड्रोन हमलों से बचने के लिए एक अनोखा तरीका अपनाया है। कभी यूरोप तक गैस पहुंचाने वाली पाइपलाइन अब सैनिकों के लिए छिपने का ठिकाना बन गई हैं।
दरअसल, रूस के लगातार ड्रोन हमलों के चलते यूक्रेनी सैनिकों के लिए खुले मैदान में आवाजाही करना मुश्किल हो गया है। ऐसे में वे पुरानी गैस पाइपलाइनों के अंदर शरण ले रहे हैं। करीब 4 फीट चौड़ी इन सुरंगों में सैनिकों को कई हफ्तों से लेकर दो महीने तक रहना पड़ता है। इन पाइपलाइनों का इस्तेमाल अब सिर्फ छिपने के लिए ही नहीं, बल्कि सैनिकों तक खाना, हथियार और दूसरी जरूरी चीजें पहुंचाने के लिए भी किया जा रहा है। कभी ऊर्जा आपूर्ति का जरिया रहीं ये पाइपलाइन अब युद्ध के मैदान में सैनिकों के लिए जीवनरेखा बन गई हैं।
रूस ने किया था पुरानी पाइपलाइनों का इस्तेमाल
यूक्रेन के कुपियांस्क इलाके में पुरानी गैस पाइपलाइनों का करीब 129 किलोमीटर लंबा नेटवर्क है। पिछले साल के आखिर में रूसी सैनिक इन्हीं पाइपलाइनों के जरिए कुपियांस्क में घुसने में कामयाब हुए थे। इसके बाद यूक्रेनी सेना ने भी जमीन के नीचे से जवाबी कार्रवाई की योजना बनाई।
इसके बाद यूक्रेन की नेशनल गार्ड की खुफिया इकाई ने इन पाइपलाइनों के नक्शे जुटाए। साथ ही, इन्हें बनाने वाले पुराने गैस विशेषज्ञों की मदद से भूमिगत रास्तों का इस्तेमाल करने की योजना तैयार की।
इसके बाद पाइपलाइनों में हवा पहुंचाने के लिए वेंटिलेशन सिस्टम लगाया गया। यह इस पूरे काम का सबसे मुश्किल हिस्सा था।
पाइपलाइनों के जरिए खाना और गोला-बारूद पहुंचाया जाता है
इन पाइपलाइनों के जरिए सैनिकों तक खाना और गोला-बारूद पहुंचाया जाता है। इसके लिए छोटी इलेक्ट्रिक गाड़ियों का इस्तेमाल होता है।
दिन में इन गाड़ियों से जरूरी सामान अंदर भेजा जाता है, जबकि रात में खुदाई से निकली मिट्टी की बोरियां बाहर लाई जाती हैं। सैनिक सिर्फ रात में ही कुछ समय के लिए बाहर निकल पाते हैं।
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थर्मल इमेजिंग की वजह से पकड़े जाना आसान
ड्रोन और थर्मल इमेजिंग तकनीक ने खुले मैदान में सैनिकों की आवाजाही को बेहद खतरनाक बना दिया है। थर्मल इमेजिंग की मदद से ड्रोन जमीन पर मौजूद लोगों के शरीर की गर्मी पहचान सकते हैं। ऐसे में सैनिकों के लिए छिपकर आगे बढ़ना भी आसान नहीं रह गया है।
इसी वजह से यूक्रेन अपनी सेना के ठिकानों, निगरानी चौकियों और सामान रखने वाले केंद्रों को आपस में जोड़ने के लिए भूमिगत सुरंगों का नेटवर्क बनाने की संभावनाएं तलाश रहा है।

