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केन-बेतवा परियोजना पर उमंग सिंघार का बड़ा खुलासा

भोपाल: मध्यप्रदेश की बहुचर्चित केन-बेतवा लिंक परियोजना को लेकर सियासत तेज हो गई है। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने “The Ken–Betwa Files” के माध्यम से केन–बेतवा परियोजना से जुड़े गंभीर दस्तावेज़ी तथ्यों और प्रभावित किसानों, आदिवासी परिवारों एवं ग्रामीणों की शिकायतों को सार्वजनिक किया। उन्होंने आरोप लगाया कि ₹44 हजार करोड़ की इस परियोजना में पहले चरण से ही ग्राम सभा प्रक्रिया, मुआवज़ा वितरण, भूमि अभिलेख, पुनर्वास, पुलिस कार्रवाई और ठेका आवंटन को लेकर गंभीर अनियमितताएँ सामने आई हैं, जिनका सरकार को जवाब देना चाहिए।

छतरपुर से उठे सवाल – सरकार जवाब दे

1.आंदोलन स्थल के दौरे में सामने आए तथ्य

प्रेस कॉन्फ्रेंस में नेता प्रतिपक्ष ने बताया कि, 14 जुलाई को ग्राम कूपी, तहसील बिजावर, जिला छतरपुर स्थित आंदोलन स्थल का दौरा कर प्रभावित किसानों, आदिवासी परिवारों और ग्रामीणों से बातचीत की। इस दौरान अनेक ऐसे तथ्य और दस्तावेज़ सामने आए जो अब तक सार्वजनिक चर्चा और मीडिया से दूर रहे। इन्हीं तथ्यों को आज जनता और मीडिया के सामने रखा जा रहा है।

2. ग्राम सभा एवं दस्तावेज़ी अनियमितताएँ

उमंग सिंघार ने ग्राम सभा प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि, प्रभावित ग्रामीणों के अनुसार पिछले लगभग चार वर्षों से विधिसम्मत ग्राम सभा प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। प्रभावित परिवारों को Social Impact Assessment (SIA) की जानकारी नहीं दी गई और न ही उन्हें प्रक्रिया में शामिल किया गया। रतिया, करी, खटवानी, पालकोहा, नय्यापुर, खजुरी एवं सुकवाहा ग्राम पंचायतों के कार्यवाही रजिस्टरों में शब्द-दर-शब्द समान भाषा दर्ज मिली। अधिकांश ग्राम सभाओं की बैठकें 17 एवं 18 फरवरी 2022 को प्रातः 11:30 बजे दर्ज हैं, जबकि अलग-अलग पंचायतों में एक ही समय पर बैठकें होना गंभीर प्रशासनिक संदेह उत्पन्न करता है। आदिवासियों की ग्राम सभा को केवल कागज़ी औपचारिकता बनाकर रख दिया गया।

3. घोस्ट हस्ताक्षर कांड

नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने घोस्ट हस्ताक्षर कांड पर सवाल उठाते हुए कहा कि, सरपंच बनने से पहले हस्ताक्षर कैसे?
खरिहानी ग्राम पंचायत के 17 फरवरी 2022 के कार्यवाही रजिस्टर में रतीराम मेहरबार के हस्ताक्षर दर्ज हैं। जबकि उस समय निर्वाचित सरपंच उमा मिश्रा थीं और रतीराम मेहरबार ने लगभग छह माह बाद पदभार ग्रहण किया।

4. मुआवज़ा वितरण में गंभीर अनियमितताएँ

प्रेस कॉन्फ्रेंस में नेता प्रतिपक्ष ने बताया कि, ग्रामीणों के अनुसार खरिहानी गांव के मकानों के लिए लगभग ₹11 करोड़ का मुआवज़ा स्वीकृत हुआ, जबकि उपलब्ध दस्तावेज़ों के अनुसार लगभग ₹8 करोड़ ऐसे लोगों को दिए गए जिनका गांव से संबंध नहीं था या जो वर्ष 1980–1990 में ही गांव छोड़ चुके थे। उदाहरण के रूप में विश्वनाथ मिश्रा का नाम सामने आया, जिनके बारे में ग्रामीणों का कहना है कि, वे वर्ष 1992 से गांव में नहीं रह रहे हैं। दूसरी ओर वास्तविक प्रभावित परिवार आज भी मुआवज़े से वंचित हैं। आंदोलनकारियों ने दस्तावेज़ों के आधार पर 500 से अधिक कथित फर्जी मुआवज़ा वितरण के मामलों की पहचान की है। खरिहानी गांव में एक ऐसे मुस्लिम परिवार के नाम भी मुआवज़ा स्वीकृत किया गया, जबकि ग्रामीणों का दावा है कि गांव में कभी ऐसा परिवार निवास नहीं करता था।

वहीं प्रेस कॉन्फ्रेंस में मुख्यमंत्री से प्रश्न करते हुए कहा कि, मुख्यमंत्री जी, आप ज़िले-ज़िले जाकर कैबिनेट बैठकें करते हैं। एक कैबिनेट बैठक केन–बेतवा परियोजना के आंदोलन स्थल पर भी कीजिए, शायद प्रभावित परिवारों का दर्द दिखाई दे।

5. भूमि अभिलेखों में कथित हेरफेर

भूमि अभिलेखों में कथित हेरफेर को लेकर उमंग सिंघार ने बताया कि, सुकवाहा गांव की वृद्ध आदिवासी महिला सुमता रानी ने आरोप लगाया कि उनकी जानकारी के बिना उनकी भूमि किसी अन्य व्यक्ति के नाम दर्ज कर दी गई और उसी के नाम मुआवज़ा भी स्वीकृत हो गया। उनके पास पीढ़ियों पुराने भूमि दस्तावेज़ उपलब्ध हैं, लेकिन मामला न्यायालय में लंबित होने के कारण उन्हें आज तक मुआवज़ा नहीं मिला।

6. आंदोलनकारियों के साथ पुलिस कार्रवाई

उमंग सिंघार पर आरोप है कि देर रात सिविल ड्रेस में पहुंचे लोगों ने आंदोलनकारियों को धमकाया। 130 से अधिक लोगों से ₹20,000–₹30,000 तक और कुछ मामलों में ₹60,000 लेकर हिरासत से छोड़े जाने की जानकारी सामने आई।
आंदोलनकारियों के मोबाइल, वाहन एवं अन्य निजी सामान जब्त किए गए। कई बार लाठीचार्ज हुआ, जिसमें बुजुर्ग महिलाएं भी घायल हुईं। प्रभावितों के अनुसार, 250 से अधिक आदिवासी ग्रामीणों पर आपराधिक प्रकरण दर्ज किए गए।
यदि ₹44 हजार करोड़ की परियोजना के पहले चरण में ही इतनी गंभीर अनियमितताएँ हैं, तो आगे क्या सामने आएगा?

7. पुनर्वास पूरा हुए बिना निर्माण

उमंग सिंघार ने बताया कि परियोजना को 3 अक्टूबर 2023 को Stage-II वन स्वीकृति मिली थी, जिसकी शर्तों के अनुसार 3 अक्टूबर 2024 तक पुनर्वास एवं भूमि हस्तांतरण पूरा होना था। इसके बावजूद वर्ष 2025 की शुरुआत में निर्माण कार्य शुरू कर दिया गया, जबकि पुनर्वास, मुआवज़ा और पात्रता से जुड़े अनेक मामले लंबित थे। पन्ना टाइगर रिजर्व के 6–7 गांवों में जबरन कब्ज़ा लेकर निर्माण कार्य शुरू करने तथा कई प्रभावित परिवारों के मकान तोड़े जाने के आरोप हैं।

8. चंदा और ठेका क्या संबंध है?

प्रेस कॉन्फ्रेंस में नेता प्रतिपक्ष ने सवाल उठाते हुए कहा कि, NCC Limited ने इलेक्टोरल बॉन्ड के माध्यम से भाजपा को ₹60 करोड़ का चंदा दिया। यही कंपनी केन–बेतवा परियोजना के दौधन बांध के लगभग ₹3,400 करोड़ के निर्माण कार्य में शामिल है। क्या ₹60 करोड़ के इलेक्टोरल बॉन्ड के बदले ₹3,400 करोड़ का ठेका दिया गया?

नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि केन–बेतवा परियोजना केवल विकास का विषय नहीं, बल्कि आदिवासी अधिकारों, किसानों के हितों, पारदर्शिता और कानून के शासन से जुड़ा गंभीर मामला है। ग्राम सभा प्रक्रिया और दस्तावेज़ी रिकॉर्ड की स्वतंत्र जांच कराई जाए। मुआवज़ा वितरण, भूमि अभिलेखों और पुनर्वास से जुड़ी सभी कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच हो। पुलिस कार्रवाई, प्रभावित परिवारों के साथ व्यवहार तथा ठेका आवंटन से जुड़े सभी प्रश्नों का सरकार सार्वजनिक रूप से उत्तर दे।

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