नई दिल्ली: भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से सोमवार को राष्ट्रपति भवन में उज्बेकिस्तान गणराज्य के विदेश मंत्री सईदोव बख्तियार ओदिलोविच ने शिष्टाचार भेंट की। इस दौरान दोनों पक्षों ने भारत-उज्बेकिस्तान संबंधों को और मजबूत बनाने के साथ व्यापार, शिक्षा, खनन, कृषि, फार्मास्यूटिकल्स और सूचना प्रौद्योगिकी समेत कई क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर विस्तृत चर्चा की।
बैठक के दौरान राष्ट्रपति मुर्मु ने उज्बेकिस्तान के प्रतिनिधिमंडल का स्वागत करते हुए कहा कि भारत और उज्बेकिस्तान के संबंध सदियों पुराने ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और सभ्यतागत मूल्यों पर आधारित हैं। उन्होंने कहा कि दोनों देशों की साझा विरासत—वास्तुकला, भाषा, खान-पान, संगीत और सांस्कृतिक परंपराएं—आज भी आपसी रिश्तों को नई मजबूती दे रही हैं।

व्यापार और निवेश बढ़ाने पर जोर
राष्ट्रपति ने भारत-उज्बेकिस्तान व्यापार मंच (India-Uzbekistan Business Forum) का उल्लेख करते हुए कहा कि इससे दोनों देशों के उद्योग जगत के बीच सहयोग और निवेश की संभावनाएं लगातार बढ़ रही हैं। उन्होंने विशेष रूप से रेयर अर्थ मिनरल्स (दुर्लभ मृदा खनिज), कृषि, फार्मास्यूटिकल्स, सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) और अन्य उभरते क्षेत्रों में साझेदारी को और मजबूत करने पर बल दिया।
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शिक्षा और कौशल विकास में बढ़ रहा सहयोग
राष्ट्रपति मुर्मु ने बताया कि भारत सरकार के आईटीईसी (ITEC) प्रशिक्षण और छात्रवृत्ति कार्यक्रम के तहत अब तक 3,000 से अधिक उज्बेक अधिकारी, पेशेवर और विद्यार्थियों ने लाभ प्राप्त किया है। वहीं, 16,000 से अधिक भारतीय छात्र वर्तमान में उज्बेकिस्तान के विभिन्न संस्थानों में उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं, जिससे दोनों देशों के बीच जन-से-जन संबंध और मजबूत हो रहे हैं।
रणनीतिक साझेदारी को मिलेगी नई गति
बता दें बैठक के अंत में दोनों पक्षों ने विश्वास जताया कि इस उच्चस्तरीय मुलाकात से भारत और उज्बेकिस्तान के बीच मित्रता, विश्वास और रणनीतिक साझेदारी को नई गति मिलेगी। साथ ही, द्विपक्षीय सहयोग को भविष्य में और व्यापक बनाने पर भी सहमति बनी।

