चेन्नई: तमिलनाडु की मुख्यमंत्री सी.जोसेफ विजय के नेतृत्व वाली TVK सरकार ने लॉ एंड ऑर्डर से जुड़े अपने एक अहम फैसले को वापस ले लिया है। सरकार ने Public (Law and Order) Department को सूचना के अधिकार यानी RTI Act, 2005 के दायरे से बाहर रखने का आदेश रद्द कर दिया है।
सरकार ने पहले RTI Act की धारा 24(4) के तहत इस विभाग को ‘Intelligence and Security Organisation’ की श्रेणी में रखते हुए छूट देने का फैसला किया था। इसके बाद इस फैसले को लेकर राजनीतिक दलों और पारदर्शिता से जुड़े कार्यकर्ताओं की ओर से विरोध सामने आया।
आखिर क्या था सरकार का फैसला?
सरकार की ओर से जारी आदेश के बाद Public (Law and Order) Department की कई जानकारियों तक सामान्य RTI आवेदन के जरिए पहुंच सीमित हो सकती थी।
इस विभाग के अंतर्गत पुलिस कार्रवाई, पुलिस फायरिंग से जुड़ी जांच रिपोर्ट, हिरासत में मौत, पुलिस टॉर्चर, राजनीतिक प्रदर्शन और कानून-व्यवस्था से जुड़े कई संवेदनशील मामले आते हैं। हालांकि RTI Act की धारा 24 में भ्रष्टाचार और मानवाधिकार उल्लंघन के आरोपों से जुड़ी जानकारी के लिए अलग प्रावधान भी मौजूद हैं।
विरोध के बाद आदेश रद्द
सरकार के फैसले की जानकारी सामने आने के बाद विपक्षी नेताओं ने इसका विरोध किया। इसके बाद रविवार को सरकार ने पुराने आदेश को रद्द कर दिया। यानी Public (Law and Order) Department को RTI से दी गई छूट अब लागू नहीं रहेगी।
CPM सांसद एस. वेंकटेशन सहित कई नेताओं ने इस फैसले पर सवाल उठाए थे। वहीं कांग्रेस सांसद कार्ति चिदंबरम ने भी कहा था कि RTI का मकसद लोकतांत्रिक जवाबदेही को मजबूत करना है और इसके दायरे को सीमित करने के बजाय बढ़ाया जाना चाहिए।
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एक ही दिन में बदला फैसला
यह मामला रविवार को तेजी से चर्चा में आया। सुबह सरकार के RTI छूट से जुड़े फैसले की खबर सामने आई और विरोध के बाद सरकार ने इसे वापस लेने की घोषणा कर दी।
सरकार के इस नए फैसले के बाद Public (Law and Order) Department को RTI Act से बाहर रखने वाली छूट खत्म हो गई है।

