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हमें सब पता है, हमसे कुछ भी छिपा नहीं, कलेक्टर-कमिश्नर मीटिंग में बोले मुख्यसचिव जैन

भोपाल। मुख्य सचिव अनुराग जैन ने कलेक्टर और कमिश्नरों से ऑनलाइन चर्चा की। इस दौरान कहा कि मुझे हर जिले की यथा स्थिति पता है। सरकारी योजनाओं का सही तरीके से क्रियान्वयन कराने में तत्परता बरतें। न्होंने अधिकारियों को भ्रष्टाचार से दूर रहने और जनता के हितार्थ सरकार की प्राथमिकताओं पर काम करने की चेतावनी दी। मुख्य सचिव ने बताया कि कुछ जिलों से शिकायतें उन तक और मुख्यमंत्री तक पहुंची हैं, इसलिए उन्हें समय रहते सुधार करना चाहिए।
मुख्य सचिव अनुराग जैन ने कलेक्टर्स से कहा है कि वे लीडर की भूमिका निभाकर सर्वश्रेष्ठ परिणाम दें। ग्रामीण विकास के लिए जिला पंचायत और नगरीय क्षेत्र के विकास के लिए स्थानीय प्रशासन से समन्वय बनाकर कार्य करने की जरूरत है। श्री जैन ने कहा कि टीम के रूप में काम करने में ही परिणाम आयेंगे और प्राथमिकता वाले क्षेत्रों के लिए सेक्टर बनाकर माह में कम से कम दो बैठक कर लंबित योजनाओं और कार्यक्रम के क्रियान्वयन में शत प्रतिशत उपलब्धि सुनिचिश्त करें। मुख्य सचिव श्री जैन ने मंत्रालय में कलेक्टर-कमिश्नर के साथ बैठक में समीक्षा की। कलेक्टर कमिश्नर और पुलिस अधीक्षक सहित अन्य अधिकारी वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से शामिल हुए। बैठक में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा वर्ष 2026 को कृषि वर्ष के रूप में मनाये जाने को ध्यान में रखते हुए संबंधित विभागों को एक वर्षीय कार्ययोजना बनाने के निर्देश दिये हैं।
मुख्य सचिव श्री जैन ने सुशासन को मध्यप्रदेश शासन का मूल्य मंत्र बताया और कहा कि नामांतरण, बटवारा और सीमांकन जैसे प्रकरणों में पेंडेंसी असंतोषजनक है। उन्होंने सम्पूर्ण राजस्व प्रक्रिया ऑनलाइन होने के बावजूद यह कार्यप्रणाली उचित नहीं है। इस मामले में पीछे रहे दर्जनों जिला कलेक्टरों को फटकार भी लगाई है। गौरतलब हो कि नामांतरण में मुरैना-भिंड, बटवारा के प्रकरणों में अनूपपूर और रीवा, भूमि के सीमांकन प्रकरणों में विदिशा और सतना, खसरा अपडेट में रीवा और इंदौर तथा अवैध कब्जा हटाने के मामले में भिंड और विदिशा जिलों की स्थिति अपेक्षाकृत असंतोषजनक पायी गयी है।
बैठक मे बताया गया कि लोक सेवा गारंटी के तहत प्राप्त 1 करोड़ 9 लाख आवेदनों में से 1 करोड़ का निराकरण किया गया है इस मामले में निवाड़ी और बड़वानी टॉप पर जबकि मऊगंज और शिवपुरी निचले पायदान पर हैं। मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि कलेक्टर संवेदनशीलता बरतें और समयअवधि बैठक में हर सप्ताह समीक्षा करें। उन्होंने निवास और आय प्रमाण पत्र, सीमांकन, अविवादित नामांतरण और जन्म के एक वर्ष पश्चात पंजीयन जैसी सेवाएं समय अवधि में निराकृत करने के निर्देश दिये।
स्वास्थ्य एवं पोषण अभियान की समीक्षा करते हुए मुख्य सचिव ने मातृ एवं शिशु मृत्यु दर को कम किये जाने के लिए कलेक्टर को निर्देशित किया। उन्होंने शिवपुरी और अशोक नगर कलेक्टर को स्थिति में सुधार लाने को कहा है। बैठक में इस बात पर भी चिंता व्यक्त की गयी कि नवविवाहित महिलाओं के समग्र आईडी नहीं बनने से स्वास्थ्य सेवाओं से वह वंचित रह जाती है। बैठक में भिंड और ग्वालियर में भी स्वास्थ्य सेवाओं की अपेक्षाकृत स्थिति ठीक नहीं होने पर असंतोष व्यक्त किया गया है। बैठक में कुपोषण की स्थिति की भी समीक्षा की गई।
श्री जैन ने कहा कि प्रदेश में अब इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी जैसी घटना की पुनरावृत्ति नहीं हों। स्पष्ट कहा कि सभी कलेक्टर सही रिपोर्ट देने की संस्कृति विकसित करें। नगरीय विकास विभाग की समीक्षा के दौरान उन्होंने प्रदेश में चलाये जा रहे पट्टा वितरण अभियान में समय अवधि के साथ सभी कार्यवाही पूर्ण करने को कहा है। उन्होंने स्वच्छ भारत मिशन और अमृत अभियान के कार्यों को गुणवत्ता से पूर्ण करने के निर्देश दिये। उन्होंने छतरपुर और मुरैना जिलों को स्वच्छ पेय जल पर विशेष ध्यान देने को कहा है। मुख्य सचिव ने 3000 पेयजल टंकियों की सफाई और पाइप-लाइन लीकेज सुधार कार्य पर संतोष व्यक्त किया। उन्होंने पी.एम स्वनिधि, नगरीय यातायात व्यवस्था, नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम, पी.एम ईव्ही बस सेवा तथा गीता भवन योजना आदि की भी समीक्षा की। बैठक में बताया गया कि प्रदेश में कहीं भी एंटी-रेवीज इंजेक्शन की कमी नहीं है।

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