बालाघाट। देश की राजधानी दिल्ली और बिहार की राजधानी पटना समेत देश के कई शहरों में होटलों और अस्पतालों में आगजनी की घटना सामने आ रही है। कई बेकसुर लोग काल के गाल में समाते जा रहें है। वही बालाघाट का जिला प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग और नगरपालिका परिषद भी ऐसे मामलों को गंभीरता से नहीं ले रही है। किसी अप्रिय घटना के घटित होने की राह देख रही है, तभी बालाघाट शहर में धडल्ले से चल रहे होटलों और अस्पतालों की समय-समय पर जांच न करते हुए लोगों की जान को खतरे में डाल रही हैl
वैसे तो आग और पानी के लिए कुछ ही मिनट काफी होते हैं सब कुछ बर्बाद करने के लिए। काबू में रहते हुए ये बहुत काम के होते हैं लेकिन बेकाबू होने के बाद जान पर बन आती है। यह जानते और समझते हुए भी बचाव के लिए हमारे उपाय, व्यवस्था और मुकम्मल तैयारी का न होना विडंबना नहीं तो और क्या कही जाएगी। जो हाल है उसमें सब कुछ भगवान ही मालिक हैं कहा जाय तो अतिशयोक्ति नहीं होगी l
आग से बचाव के लिए महफूज है होटल और अस्पताल
बालाघाट शहर में मुख्य स्थानों और घनी आबादी के बीच कई होटल, अस्पताल एवं कदम-कदम पर निजी क्लिनिक खुले हुए हैं। होटलों में जहाँ कई लोग सुरक्षित रूप से ठहरने और अपने परिवार के साथ समय व्यतीत करने तथा अस्पताल में कई लोग अपने मरीजों का उपचार कराने के लिए आते है। किन्तु शहर के कई होटल और अस्पताल ऐसे है, जहाँ मुलभुत सुविधा भी उपलब्ध नहीं है। ऐसे में जो लोग होटलों और अस्पताल के व्यवसाय में लोगों को सुरक्षा की गारंटी देते है। उनकी समय-समय पर जांच किया जाना जिला प्रशासन का कर्तव्य होता है। ताकि ऐसे स्थानों पर कोई गंभीर घटना न घट सके और कोई भी व्यक्ति असमय ही काल के गाल में समा न सकेl
होटलों और अस्पताल संचालकों को द्वारा लोगों को उचित व्यवस्था और उनकी जान बचाने के दावे किए जाते हैं, लेकिन इन्हें लोगों की जान की कितनी परवाह है। इसका अंदाजा वहां अग्निशमन सुरक्षा के इंतजामों से ही लगाया जा सकता है। अधिकांश होटलों, अस्पतालों एवं निजी क्लीनिकों में आग से बचाव के इंतजाम नदारद हैं। गिनती के अग्निशमन उपकरण लगाकर खानापूर्ति की गई है। ऐसे में दिल्ली, पटना समेत अन्य शहरों में होटल समेत अस्पताल की तरह न चाहते हुए यहां कभी आगजनी समेत कोई गंभीर घटना घट जाएँ तो बड़ी अनहोनी से इंकार नहीं किया जा सकता।
होटलों के लिए सुरक्षा के मानदंड
होटलों में सुरक्षा के बुनियादी मानदंड मेहमानों, कर्मचारियों और संपत्ति की सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। इनमें प्रवेश नियंत्रण, चौबीसों घंटे सीसीटीवी निगरानी, आपातकालीन निकासी योजना और प्रशिक्षित सुरक्षा स्टाफ शामिल हैं, जो किसी भी अनहोनी या आपातकाल से निपटने में मदद करते हैं। होटल के प्रवेश द्वारों की संख्या सीमित होनी चाहिए। बाहरी लोगों (गैर-मेहमानों) की गतिविधियों पर नज़र रखने के लिए प्रवेश बिंदुओं पर सुरक्षा गार्ड और सीसीटीवी कैमरे लगे होने चाहिए। गलियारों, लिफ्टों, पार्किंग और सामान्य क्षेत्रों में सीसीटीवी कैमरे 24/7 सक्रिय होने चाहिए। इससे किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर नज़र रखी जा सकती है। आग लगने या प्राकृतिक आपदाओं के दौरान निकासी के आपातकालीन मार्ग, स्प्रिंकलर, स्मोक डिटेक्टर और अग्निशमन यंत्र अनिवार्य रूप से होने चाहिए। हाउसकीपिंग और मेंटेनेंस स्टाफ सहित सभी कर्मचारियों का सपूर्ण ब्यौरा और पुलिस से चरित्र सत्यापन होना चाहिए।
अस्पतालों के लिए सुरक्षा के मानदंड
अस्पताल सुरक्षा मानदंड का मुख्य उद्देश्य मरीजों, कर्मचारियों और आगंतुकों के लिए एक सुरक्षित, संक्रमण-मुक्त और सुव्यवस्थित वातावरण प्रदान करना है। ये मानदंड गुणवत्ता और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए बनाए गए हैं। आग, भूकंप या गंभीर मौसमी आपदाओं के दौरान मरीजों को सुरक्षित निकालने के लिए स्पष्ट निकासी मार्ग और आपातकालीन मार्ग होना चाहिए। संवेदनशील क्षेत्रों, प्रवेश द्वारों और गलियारों में 24/7 सीसीटीवी कैमरों से निगरानी होनी चाहिए। आईसीयू और संवेदनशील वार्डों में केवल अधिकृत व्यक्तियों को ही प्रवेश देना चाहिए। सभी डॉक्टरों, नर्सों और कर्मचारियों की पृष्ठभूमि की कड़ी जांच करना चाहिए। अस्पताल के हर फ्लोर पर अग्निशामक यंत्रों की उपलब्धता और समय-समय पर ऑडिट होना चाहिए। आग लगने की स्थिति में ऑटोमैटिक स्प्रिंकलर और स्मोक अलार्म सिस्टम लगा होना चाहिए।
अप्रशिक्षित कर्मचारी
किसी भी संस्थान के कर्मचारियों के लिए आग और अन्य आपदा की स्थिति से निपटने के लिए सरकार ने प्रशिक्षण अनिवार्य किया हैं। इसके बावजूद होटलों, अस्पतालों या अन्य संस्थान इसे लेकर गंभीर नहीं हैं। अग्निशमन विभाग की ओर से भी इस बारे में कभी पहल नहीं की जाती। जबकि नियमानुसार सम्बंधित विभागों को समय-समय पर होटलों, अस्पतालों समेत अन्य भवनों की जांच की जानी चाहिए लेकिन इनके द्वारा ऐसा नहीं किया जाता है जिससे लगता है कि ये लोग भी किसी गंभीर घटना के इन्तजार में बैठे रहते है और बाद में कार्यवाही के नाम पर खानापूर्ति करते है
ऐसे में अब यह देखना है कि बालाघाट का जिला प्रशासन देश की राजधानी दिल्ली तथा बिहार की राजधानी पटना समेत देश के कई शहरों में होटलों और अस्पतालों में आगजनी की जकझोर देने वाली घटना सामने और उसमे कई बेकसुर लोगों की ह्रदय विदारक घटना के बाद असमय काल के गाल में समाने के बाद क्या कार्यवाही करता है या बालाघाट के रसूकदारों के सामने नतमस्तक रहकर किसी ह्रदय विदारक घटना घटने की राह तकते रहता है l

