अजित पवार अचानक ‘नॉट रिचेबल’ क्यों हुए? बारामती हॉस्टल से अकेले निकलने ने बढ़ाई महाराष्ट्र की सियासी धड़कन

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मुम्बई। नगर निगम चुनावों से पहले महाराष्ट्र की राजनीति में अचानक रहस्य और सस्पेंस गहराता दिखा, जब उपमुख्यमंत्री अजित पवार बिना किसी को बताए, बिना काफिले और सुरक्षा के बारामती हॉस्टल से अकेले निकल गए। सवाल एक ही, आखिर हुआ क्या?
महाराष्ट्र की राजनीति में उस वक्त हलचल तेज हो गई, जब उपमुख्यमंत्री और एनसीपी नेता अजित पवार अचानक ‘नॉट रिचेबल’ हो गए। पुणे के बारामती हॉस्टल में एनसीपी के दोनों गुटों की अहम बैठक चल रही थी। यह बैठक करीब चार से पांच घंटे तक चली, जिसमें नगर निगम चुनावों को लेकर सीट बंटवारे और रणनीति पर गहन मंथन हुआ। माहौल ऐसा था कि बातचीत लगभग अंतिम चरण में पहुंच चुकी थी।
लेकिन इसी बीच अचानक ऐसा हुआ, जिसने तमाम राजनीतिक समीकरणों को उलझा दिया। बैठक के बाद अजित पवार बिना किसी को सूचना दिए, बिना सरकारी काफिले और पुलिस सुरक्षा के अकेले हॉस्टल से निकल गए। न कोई प्रेस ब्रीफिंग, न कोई आधिकारिक बयान, बस सन्नाटा और अटकलें। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि एनसीपी के दोनों गुटों के बीच सबसे बड़ा पेंच चुनाव चिन्ह को लेकर फंसा। सवाल यह था कि चुनाव ‘घड़ी’ के सिंबल पर लड़ा जाए या ‘तुरही’ पर। यही मुद्दा बातचीत के टूटने की वजह बना। माना जा रहा है कि इसी असहमति के बाद अजित पवार का अचानक निकल जाना भावनात्मक और राजनीतिक, दोनों संकेत देता है।
सूत्रों के मुताबिक, अजित पवार ने हॉस्टल से निकलते वक्त कथित तौर पर कहा, कोई पीछे न आए। यह वाक्य अपने आप में कई सवाल खड़े करता है। क्या यह केवल गुस्से का इजहार था या किसी बड़े फैसले की भूमिका?
कुछ कयास लगाए जा रहे हैं कि अजित पवार पारिवारिक कारणों से अपने साले के घर पहुंचे, लेकिन इस बारे में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई। वहीं दूसरी ओर, शरद पवार गुट के साथ बातचीत फेल होने की खबरें और देर रात महाविकास अघाड़ी की बैठक ने सियासी पारा और चढ़ा दिया है।
नगर निगम चुनावों से पहले यह घटनाक्रम साफ संकेत दे रहा है कि एनसीपी की अंदरूनी खींचतान अभी खत्म नहीं हुई है। अजित पवार का यूं अचानक गायब होना केवल एक व्यक्तिगत फैसला नहीं, बल्कि महाराष्ट्र की राजनीति में आने वाले बड़े सियासी भूचाल का संकेत भी माना जा रहा है। अब सबकी निगाहें इस सवाल पर टिकी हैं, अजित पवार की अगली चाल क्या होगी?