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“आगे कुआं, पीछे खाई” – अमेरिकी ट्रेड डील पर राहुल गांधी का तीखा हमला

दिल्ली। अमेरिका के साथ प्रस्तावित ट्रेड डील को लेकर देश की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। जिसके बाद कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर आरोप लगाया है कि यह समझौता भारत के कपास किसानों और टेक्सटाइल सेक्टर दोनों के लिए जोखिम भरा साबित हो सकता है। उनका कहना है कि सरकार ने डील के कई अहम बिंदुओं को पारदर्शी तरीके से सामने नहीं रखा और देश को एक “नो-विन सिचुएशन” में डाल दिया है।

टैरिफ पॉलिटिक्स: 8% बनाम 0%

साथ ही राहुल गांधी ने अपने बयान में टैरिफ स्ट्रक्चर को मुख्य मुद्दा बताया है। उनके मुताबिक, बांग्लादेश को अमेरिका में गारमेंट्स एक्सपोर्ट पर 0% टैरिफ का फायदा मिल रहा है, बशर्ते वह अमेरिकी कपास आयात करे। वहीं भारत के गारमेंट्स पर 18% टैरिफ की घोषणा की गई है। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर भारत भी यही रियायत चाहता है तो क्या उसे अमेरिकी कपास आयात करने के लिए बाध्य होना पड़ेगा?

डबल इम्पैक्ट का खतरा

वहीं राहुल गांधी का तर्क है कि अगर भारत बड़े पैमाने पर अमेरिकी कपास मंगवाता है, तो घरेलू कपास किसानों की कमाई और बाजार हिस्सेदारी पर सीधा असर पड़ेगा। दूसरी ओर, अगर भारत आयात नहीं करता, तो टेक्सटाइल इंडस्ट्री को ऊंचे टैरिफ के कारण ग्लोबल मार्केट में प्रतिस्पर्धा करने में दिक्कत होगी। यानी दोनों ही हालात में नुकसान की आशंका है।

रोजगार और अर्थव्यवस्था पर असर

उन्होंने कहा कि भारत का टेक्सटाइल सेक्टर और कपास की खेती करोड़ों लोगों की आजीविका से जुड़ी है। यह केवल एक ट्रेड पॉलिसी का सवाल नहीं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था, एमएसएमई यूनिट्स और निर्यात-आधारित रोजगार का भी मुद्दा है। अगर डील संतुलित नहीं हुई, तो इसका असर किसानों से लेकर फैक्ट्री वर्कर्स तक महसूस किया जा सकता है।

सरकार पर पारदर्शिता का सवाल

राहुल गांधी ने केंद्र सरकार, जिसका नेतृत्व Narendra Modi कर रहे हैं, पर यह भी आरोप लगाया कि संसद और जनता को पूरी जानकारी नहीं दी गई। उनके मुताबिक, एक दूरदर्शी और रणनीतिक सरकार ऐसा समझौता करती जो “विन-विन” मॉडल पर आधारित होता जहां किसान और उद्योग दोनों सुरक्षित रहते।

 

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