दिल्ली। देश में बढ़ते डॉग बाइट मामलों और आवारा कुत्तों की समस्या पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने एक बेहद अहम टिप्पणी की है। अदालत ने अपने फैसले में वैज्ञानिक चार्ल्स डार्विन की चर्चित ‘Survival of the Fittest’ थ्योरी का जिक्र करते हुए कहा कि अगर सार्वजनिक जगहों पर हालात ऐसे ही बने रहे, तो समाज एक ऐसी स्थिति में पहुंच जाएगा जहां सिर्फ ताकतवर और सक्षम लोग ही सुरक्षित रह पाएंगे। सुप्रीम कोर्ट की यह टिप्पणी अब पूरे देश में चर्चा का विषय बन गई है।
आखिर कोर्ट ने डार्विन की थ्योरी का जिक्र क्यों किया?
बता दें सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि देश में पशु जन्म नियंत्रण यानी ABC Rules के बावजूद आवारा कुत्तों की संख्या और डॉग बाइट की घटनाओं पर प्रभावी नियंत्रण नहीं हो पाया है। अदालत के मुताबिक, अगर सड़कों, कॉलोनियों और सार्वजनिक स्थानों पर नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं की गई, तो कमजोर, बुजुर्ग, बच्चे और महिलाएं सबसे ज्यादा खतरे में रहेंगे। इसी संदर्भ में अदालत ने कहा कि ऐसी स्थिति ‘Survival of the Fittest’ जैसी होगी, जहां केवल वही सुरक्षित रहेगा जो खुद को बचाने में सक्षम होगा।
क्या है डार्विन की ‘Survival of the Fittest’ थ्योरी?
ब्रिटिश वैज्ञानिक चार्ल्स डार्विन ने विकासवाद थ्योरी दी थी। इस सिद्धांत के अनुसार- प्रकृति में वही जीव लंबे समय तक जीवित रहते हैं, जो परिस्थितियों के अनुसार खुद को बेहतर ढंग से ढाल लेते हैं। इसी सोच को बाद में ‘Survival of the Fittest’ कहा गया।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
जानकारी अनुसार, जस्टिस विक्रमनाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एनवी अंजारिया की बेंच ने साफ कहा कि नागरिकों की सुरक्षा सर्वोपरि है। कोर्ट ने अपने पुराने आदेश को बरकरार रखते हुए कहा कि सार्वजनिक जगहों से आवारा कुत्तों को हटाने के निर्देश जारी रहेंगे। साथ ही अदालत ने यह भी कहा कि राज्यों को पशु जन्म नियंत्रण नियमों का सख्ती से पालन करना होगा।
वहीं सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि देशभर में रेबीज और डॉग अटैक के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। अदालत ने टिप्पणी की कि बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों पर हुए हमलों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने राज्यों को चेतावनी दी कि अगर पुराने आदेशों का पालन नहीं हुआ, तो अवमानना की कार्रवाई भी की जा सकती है।
इस फैसले से पशु प्रेमी संगठनों और एनिमल वेलफेयर ग्रुप्स को बड़ा झटका लगा है। सुप्रीम कोर्ट ने पशु कल्याण बोर्ड से जुड़ी कई याचिकाओं को खारिज करते हुए साफ कर दिया कि मानव सुरक्षा और सार्वजनिक व्यवस्था से समझौता नहीं किया जा सकता।

