नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित चिन्मय अमृत महोत्सव वैश्विक सम्मेलन का उद्घाटन किया। चिन्मय मिशन के 75 वर्ष पूरे होने के अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम में प्रधानमंत्री ने भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिकता और राष्ट्र निर्माण में युवाओं की भूमिका पर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि सशक्त भारत के निर्माण में युवाओं की भागीदारी सबसे महत्वपूर्ण है और उनकी नीतियों के केंद्र में हमेशा युवा रहे हैं।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि चिन्मय मिशन के अमृत महोत्सव में शामिल होना उनके लिए एक अलग आध्यात्मिक अनुभव है। उन्होंने इस अवसर को संतों के स्नेह और आशीर्वाद से जुड़ा बताते हुए चिन्मय मिशन के सभी सदस्यों और अनुयायियों को शुभकामनाएं दीं।
चिन्मय मिशन केवल संस्था नहीं, एक विचार है
प्रधानमंत्री मोदी ने चिन्मय मिशन के कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि यह केवल एक संस्था नहीं, बल्कि एक विचार है। इसकी स्थापना स्वामी चिन्मयानंद ने की थी और पिछले कई दशकों से यह संस्था भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिक ज्ञान और जीवन मूल्यों को लोगों तक पहुंचाने का काम कर रही है।
उन्होंने कहा कि चिन्मय मिशन की यात्रा सेवा, समर्पण और आध्यात्मिक संकल्पों से भरी रही है। यही कारण है कि आज देश और दुनिया में बड़ी संख्या में लोग इस मिशन से जुड़े हुए हैं।
प्रधानमंत्री ने कहा कि चिन्मय मिशन ने समाज को आध्यात्मिक दिशा देने के साथ नई पीढ़ी को भारतीय परंपराओं से जोड़ने में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
युवा बन रहे भारतीय संस्कृति के ब्रांड एम्बेसडर
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में युवाओं की विशेष रूप से चर्चा की। उन्होंने कहा कि चिन्मय मिशन के प्रयासों से आज लाखों युवा दुनिया के अलग-अलग देशों में भारतीय संस्कृति के ब्रांड एम्बेसडर के रूप में काम कर रहे हैं।
ये युवा भारतीय संस्कारों, परंपराओं और जीवन मूल्यों को नई पीढ़ी तक पहुंचा रहे हैं। उन्होंने कहा कि भारत को विकसित और सशक्त बनाने के लिए युवाओं की ऊर्जा, प्रतिभा और भागीदारी जरूरी है।
प्रधानमंत्री के अनुसार, युवा केवल देश का भविष्य नहीं हैं, बल्कि वर्तमान में भी देश की प्रगति में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं। इसलिए उन्हें सही दिशा और अवसर देना आवश्यक है।
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राष्ट्र और संस्कृति एक-दूसरे से जुड़े हैं
प्रधानमंत्री मोदी ने स्वामी चिन्मयानंद के जीवन का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने आध्यात्मिकता के साथ राष्ट्रहित को भी हमेशा महत्व दिया। वे जितनी श्रद्धा से आध्यात्मिक विषयों पर बोलते थे, उतनी ही गंभीरता से राष्ट्र से जुड़े मुद्दों पर भी अपने विचार रखते थे।
प्रधानमंत्री ने कहा कि हमारा राष्ट्र ही हमारी संस्कृति की जन्मभूमि है और यही हमारे अस्तित्व का आधार है। इसलिए राष्ट्र को जागरूक, मजबूत और उन्नत बनाना सभी की जिम्मेदारी है।
उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति केवल परंपराओं तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समाज को एकजुट रखने और जीवन में सही दिशा देने का काम भी करती है।

