वारासिवनी। बालाघाट जिले के वारासिवनी में शासकीय चावल की कथित अफरा-तफरी और रीसाइक्लिंग से जुड़ा एक मामला सामने आया है। खाद्य एवं राजस्व विभाग की संयुक्त टीम द्वारा किए गए परिस्थितियों में संचेती औचक निरीक्षण में भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) का 242.55 क्विंटल कस्टम मिल्ड राइस (CMR) संदिग्ध राइस मिल परिसर में पाया गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने तीन लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर जांच तेज कर दी है।
औचक निरीक्षण में पकड़ा गया संदिग्ध ट्रक
जानकारी के अनुसार, 3 जून 2026 की शाम तहसीलदार, नायब तहसीलदार और कनिष्ठ आपूर्ति अधिकारी निहारिका अवस्थी की टीम ने वारासिवनी स्थित संचेती राइस मिल का निरीक्षण किया। जांच के दौरान मिल परिसर के भीतर लगभग 500 मीटर अंदर एक ट्रक (क्रमांक CG04JD3147) खड़ा मिला, जिसमें 490 बोरियों में भरा 242 क्विंटल 55 किलोग्राम शासकीय चावल लोड था। अधिकारियों को ट्रक की स्थिति संदिग्ध लगी, क्योंकि परिसर के सामने पर्याप्त खुली जगह उपलब्ध होने के बावजूद वाहन को अंदर छिपाकर खड़ा किया गया था।
ड्राइवर और मिल मालिक के बयानों में मिला विरोधाभास
वहीं पूछताछ के दौरान ट्रक चालक और राइस मिल संचालक के बयान एक-दूसरे से मेल नहीं खाए। चालक दुर्गेश शेन्दे ने दावा किया कि वह एफसीआई नवेगांव-कोसमी डिपो से चावल लेकर छिंदवाड़ा स्थित एथेनॉल प्लांट जा रहा था और रात में रुकने के लिए वाहन वहां खड़ा किया था। वहीं संचेती राइस मिल के संचालक सौरभ संचेती ने कहा कि बारिश की संभावना को देखते हुए ट्रक को केवल टीन शेड के नीचे खड़ा करने की अनुमति दी गई थी।
जांच अधिकारियों ने पाया कि ट्रक पहले से तिरपाल से पूरी तरह ढका हुआ था और एफसीआई डिपो से एक साथ निकले अन्य वाहन वहां मौजूद नहीं थे। इससे अधिकारियों को संदेह हुआ कि वास्तविक तथ्यों को छिपाने की कोशिश की जा रही है।
एफसीआई डिपो प्रबंधन ने खोली पूरी कहानी
एफसीआई नवेगांव-कोसमी डिपो के प्रबंधक हिरा सिंह परस्ते ने अपने बयान में स्पष्ट किया कि उक्त चावल एथेनॉल उत्पादन योजना के तहत छिंदवाड़ा जिले के बोरगांव स्थित AVJ Agrico Private Limited को आवंटित किया गया था। नियमानुसार चावल को सीधे एथेनॉल प्लांट पहुंचाया जाना था, लेकिन वह निर्धारित गंतव्य तक पहुंचने के बजाय वारासिवनी स्थित राइस मिल में पाया गया। इस खुलासे के बाद मामले ने और गंभीर रूप ले लिया।
जांच में सामने आई कथित रीसाइक्लिंग की साजिश
प्रारंभिक जांच में अधिकारियों ने आशंका जताई है कि एथेनॉल उत्पादन के लिए आवंटित शासकीय चावल को स्थानीय राइस मिल में खपाकर उसे सरकारी कस्टम मिलिंग (CMR) के कोटे में समायोजित करने की योजना बनाई गई थी।
सूत्रों के अनुसार, योजना यह थी कि सरकारी चावल को राइस मिल में उपयोग कर उसकी जगह बाजार से कम कीमत पर खरीदा गया चावल एथेनॉल प्लांट भेजा जाए। यदि यह आशंका सही साबित होती है तो इससे शासन को आर्थिक नुकसान पहुंचाने के साथ-साथ सार्वजनिक वितरण प्रणाली की पारदर्शिता पर भी सवाल खड़े होते हैं।
बयान दर्ज कराने से पहले ही गायब हुआ प्रतिनिधि
जांच के दौरान एथेनॉल प्लांट के अधिकृत प्रतिनिधि राहुल प्रताप को बयान दर्ज कराने के लिए बुलाया गया था। अधिकारियों के अनुसार वह बिना बयान दिए ही वहां से चला गया और बाद में उसका मोबाइल फोन भी बंद मिला। इस घटनाक्रम ने जांच एजेंसियों के संदेह को और मजबूत कर दिया।
तीन लोगों के खिलाफ नामजद FIR
कलेक्टर और अनुविभागीय अधिकारी के निर्देश पर कनिष्ठ आपूर्ति अधिकारी की लिखित शिकायत के आधार पर थाना वारासिवनी में मामला दर्ज किया गया है। एफआईआर में तीन लोगों को नामजद आरोपी बनाया गया है—
- दुर्गेश शेन्दे, ट्रक चालक, निवासी मेंहदीवाड़ा, वारासिवनी
- राहुल प्रताप, अधिकृत प्रतिनिधि, AVJ Agrico Private Limited, बोरगांव, छिंदवाड़ा
- सौरभ संचेती, संचालक, संचेती राइस मिल, वारासिवनी
इन सभी के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 316(3) एवं 3(5) के तहत शासकीय चावल की अफरा-तफरी और कथित अनियमितता का मामला दर्ज किया गया है।
प्रशासन ने दिए सख्त कार्रवाई के संकेत
खाद्य एवं राजस्व विभाग के अधिकारियों का कहना है कि पूरे मामले की गहन जांच जारी है। दस्तावेजों, परिवहन रिकॉर्ड, संबंधित संस्थाओं और आरोपियों की भूमिका की विस्तृत पड़ताल की जा रही है। जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन का मानना है कि सरकारी खाद्यान्न की सुरक्षा और सार्वजनिक वितरण प्रणाली में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई आवश्यक है।

